किसी का आलसी या तेज होना उसके व्यवहार पर नहीं, बल्कि उसके दिमाग पर निर्भर करता है। कनाडा की 'द यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया' में हुए एक शोध से खुलासा हुआ है कि प्राकृतिक तौर पर हमारा दिमाग आलसी होने के लिए ही बना है।
आंकड़ों से यह पता चलता है कि आप भले ही कितना भी शारीरिक रूप से सक्रिय रहें, लेकिन आपका आलस नहीं जाता। शोधकर्ताओं ने युवाओं को कंप्यूटर के सामने बैठाया और उनमें हो रहे परिवर्तनों का अध्ययन किया। उन्हें शारीरिक सक्रियता और असक्रियता की छोटी-छोटी तस्वीरें दिखाई गईं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि आमतौर पर प्रतिभागियों ने तस्वीरों पर प्रतिक्रिया देने में तेजी दिखाई, लेकिन जब उनके मस्तिष्क की गतिविधियों का अध्ययन किया गया, तो सामने आया कि आलस्य वाली तस्वीर पर प्रतिक्रिया देने में मस्तिष्क को ज्यादा मेहनत करना पड़ा।