भारत के इतिहास में शूरवीरों की चर्चा, छत्रपति शिवाजी महाराज के बिना अधूरी है। मुगलों को नाकों चने चबवाने और भारत के इतिहास को गौरवशाली बनाने में शिवाजी महाराज का योगदान अविस्मरणीय है। यही कारण है कि 6 जून का दिन महाराष्ट्र में ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए बड़ा गौरवमयी माना जाता है। इसी दिन मुगलों को परास्त कर शिवाजी वापस लौटे थे और उनका सम्राट को रूप में राज्याभिषेक हुआ था। हर साल 6 जून को छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस लेख में हम जानेंगे कि मराठा इतिहास में यह दिन क्यों इतना अहम माना जाता है?
हिंदुओं के साथ मुगल शासक करते थे अत्याचार
छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है। शिवाजी महाराज का जन्म इतिहास के एक ऐसे युग में हुआ था जब दक्षिण के बीजापुर (कर्नाटक) में आदिल शाह और उत्तर में आगरा/दिल्ली में मुगल बादशाहों का शासन था। ऐसा शासन जिसमें हिंदुओं के साथ घोर अत्याचार होता था। अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिए मुगल शासकों ने अदालतों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर ईरानी (फारसी) और मध्य एशियाई लोगों को प्राथमिकता देनी शुरू कर दी, ऐसे में स्थानीय भारतीय जागीरों को किनारे कर दिया गया। लोगों के बीच में असंतोष का माहौल तो था लेकिन कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था जो इसके खिलाफ आवाज उठा सके।