साल 2025 के पहले अमर उजाला संवाद का आगाज हो चुका है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। अमर उजाला के इस वैचारिक संवाद कार्यक्रम में कला, मनोरंजन, शिक्षा, राजनीति, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी देश की जानी मानी शख्सियत, विचारक और विशेषज्ञ शामिल हुए हैं।
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम के लिए सुदर्शन पटनायक ने रेत से कलाकारी की है जिसके लिए उन्हें करीब 6 घंटे का समय लगा। शिखा शर्मा ने भी कार्यक्रम के लिए रंगोली बनाई है।
शिखा कहती हैं, मेरा सपना डॉक्टर बनने का था, पर मैंने अपने पैशन को चुना। हालांकि इसके लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।शिखा ने उज्जैन से केदारनाथ तक रंगोली बनाई, जोकि वर्ल्ड रिकॉर्ड है। केदारनाथ के 21 किलोमीटर के ट्रैक पर रंगोली बनाई।
'समंदर किनारे रेत पर कलाकृति'
मशहूर सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने कहा कि जब मैंने बचपन में पुरी के समंदर किनारे रेत पर कलाकृति बनाना शुरू किया, हमको ये पता चला कि 14वीं शताब्दी में महाप्रभु जगन्नाथ जी के भक्त थे बलराम दास, उन्होंने भगवान जगन्नाथ की मूर्ति बनाकर पूजा की और जगन्नाथ के तीन रथ जाते हैं, भाई और बहन का रथ मौसी के घर चला गया, भगवान जगन्नाथ का रथ रुक गया। क्योंकि वो अपने भक्त के रथ पर बैठ गए थे तब से भारत और पुरी समंदर किनारे का रेत पवित्र हो गया।
सुदर्शन पटनायक को कहा, मैंने कई बार गणेश जी की रेत से कलाकृति बनाई और इसे दुनियाभर में सराहा गया। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं मेरी रेत कला के दौरान भी कई बार उनकी शक्ति और महिमा देखने को मिली है।
3000 स्क्वायर फीट की रंगोली को विश्व रिकॉर्ड-
शिखा बताती हैं-
कोविड के समय में मैने कई रंगोली बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। मेरा लक्ष्य विश्व रिकॉर्ड बनाना था इसके लिए मैंने 3000 स्क्वायर फीट की रंगोली बनाई। रिकॉर्ड्स तो सबको याद रहते हैं पर असल में उसके पीछे कई सारी चुनौतियां होती हैं। मैंने प्रभु श्री राम की कई बड़ी-बड़ी रंगोली बनाई है जिसे वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह मिली है। जब हम भगवान की रंगोली बनाते हैं तो इस समय कई बातों का ध्यान रखना होता है जैसे जूते-चप्पल न पहनना। सर्दियों में कई चुनौतियां होती है, पर साथियों की मेहनत मुझे प्रेरणा देती है।
एक चुनौती ये भी है कि पेंटिंग्स और आर्ट तो बिक जाती हैं, पर आप रंगोली कैसे बचेंगे। इसके लिए मैंने सोशल मीडिया पर इसके वीडियो डालने शुरू किए। विराट कोहली ने भी मेरी रंगोली की वीडियो शेयर की, जो काफी प्रोत्साहित करने वाला था।
समंदर के रेत को बनाया अपना कैनवास
सैंड आर्ट के बारे में सुदर्शन पटनायक ने कहा, इस कला को दुनियाभर में पहचान मिली है। मैने समंदर के रेत को अपना कैनवास बनाया और उसपर कुछ-कुछ बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे पर्यटकों को ये पसंद आने लगा।
कई बार लोगों के मन में सवाल आता है कि रेत पर बनी कला कितनी देर टिकेगी, एक झोंका आया तो सारी मेहनत खराब।
सुदर्शन कहते हैं-
इस पर मेरा मानना है कि मुझे ये नहीं पता कि अगले सेकेंड में मैं जीवित रहूंगा या नहीं तो कला के बारे में क्यों सोचना। इसी सोच पर मैंने इस कला का आगे ले जाने की कोशिश की है।
मैं हमेशा ये सोचता हूं कि कल मुझे क्या करना है। शायद अब समंदर भी मुझे समझने लगा है और हर दिन एक नया कैनवास दे देता है। समंदर की वजह से मैं हूं। आज देश में बहुत सारे कलाकार हैं, इसके वैश्विक स्तर पर अब कई कंपटीशन होने लगे हैं।
यहां देखिए वीडियो-