आप अपने बच्चे को जिन हाथों में सौंप रहे हैं, उस नैनी का पुलिस सत्यापन जरूर जांच लें। क्योंकि नैनी सिर्फ बच्चे की देखभाल नहीं करती बल्कि उसे भावनात्मक रूप से भी संभालती है। इसलिए उसका पहचान पत्र, पिछला रिकॉर्ड, पता आदि की भी जानकारी भी आपके पास हो।
पूर्व अनुभव व आपातकालीन स्थिति से निपटने की समझ
जिस नैनी को आप चुन रहे हैं उसके पास बच्चों को संभालने का पूर्व अनुभव भी हो। साथ ही आपातकालीन स्थिति में उस समस्या से निपटने की उसकी समझ को भी जानना चाहिए। इसके अलावा प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए।
नैनी का व्यवहार और धैर्य जरूर परखें
बच्चे का स्वभाव बड़ा जिद्दी प्रवृत्ति का होता है। ऐसे में कई बार उनके माता-पिता तक उनके व्यवहार से तंग आ जाते हैं। इसलिए नैनी का बच्चे के साथ उनका बर्ताव संवेदनशील, धैर्यवान और स्नेहपूर्ण हो। सही नैनी के चुनाव के लिए इस बात की परख भी आपको करनी चाहिए।
पिछली नौकरी वाली जगह से नैनी की पड़ताल
नैनी के चुनाव में बिल्कुल जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि जल्दबाजी में आपकी चूक आपके मासूम के जीवन पर गलत असर डाल सकती है। इसके लिए आपको नैनी की पिछली नौकरी वाली जगह भी पड़ताल करनी चाहिए। इसके बाद ही फैसला लें।
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नैनी रखने से पहले जरूर लें ट्रायल पीरियड
नैनी या बेबीसिटर को काम पर रखने के बाद तुरंत उस पर पूरी तरह निर्भर होने के बजाय कुछ समय तक उसके काम और व्यवहार पर नजर रखना जरूरी है। इस दौरान देखें कि वह बच्चे की जरूरतों को कितनी अच्छी तरह समझती है, उसके साथ कैसा व्यवहार करती है और अपनी जिम्मेदारियां कितनी सावधानी से निभाती है।
नैनी को बताएं बच्चे की देखभाल से जुड़े जरूरी नियम
नैनी को काम पर रखने के बाद कई बार जिम्मेदारियों को लेकर गलतफहमी हो सकती है। ऐसे में वह किसी काम को करने से यह कहकर मना कर सकती है कि उसे इसके बारे में पहले नहीं बताया गया था। इस तरह की परेशानी से बचने के लिए जरूरी है कि आप शुरुआत में ही उसके काम और जिम्मेदारियों की एक स्पष्ट सूची तैयार कर लें।
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