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कुछ लोगों के साथ बैठते ही क्यों मिलता है सुकून? दिमाग ऐसे करता है ‘सेफ्टी चेक’

Mon, 28 Sep 2026 04:43 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कई लोगों से मिलकर लगता है, “ये पहले क्यों नहीं मिले?” वहीं, कुछ से मिलकर मन कहता है, “इनसे कभी मुलाकात न हो।” जानकार कहते हैं, इसके पीछे सिर्फ दिमाग नहीं, शरीर का विज्ञान भी काम करता है।
 
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अजनबी से बात करने का मन क्यों करता है - फोटो : AI
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विस्तार
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मेट्रो में सुनीता ने कुछ ही देर पहले मिली ममता से अपनी बातें कहकर दिल की सारी थकान उतार ली। जाते-जाते उसने कहा, “पता नहीं क्यों दीदी, आपसे मिलकर ऐसा लगा कि सब कह डालूं।” हो सकता है, आपने भी कभी ऐसा महसूस किया हो! जिंदगी में कई बार कुछ ऐसे लोग आते हैं, जिनकी मौजूदगी से मन शांत हो जाता है। लेकिन क्या यह केवल दिल का मामला है या इसके पीछे विज्ञान भी काम करता है?

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दिमाग करता है ‘सेफ्टी चेक’

अमेरिका के प्रिंस्टन विश्वविद्यालय में हुए अध्ययन के अनुसार, हमारा मस्तिष्क किसी नए चेहरे के बारे में एक सेकंड से भी कम समय में प्रारंभिक राय बना सकता है। इस प्रक्रिया में एमिग्डाला सबसे पहले यह जांचता है कि सामने वाला व्यक्ति सुरक्षित है या नहीं। यदि उसके चेहरे के भाव, आवाज और व्यवहार में अपनापन दिखता है तो मस्तिष्क खतरे का संकेत नहीं देता। परिणामस्वरूप शरीर रिलैक्स हो जाता है और आपको अच्छा महसूस होता है।

ऑक्सीटोसिन में बढ़ोतरी

जब आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ होती हैं, जो आपको अच्छा महसूस कराए, तो शरीर में ऑक्सीटोसिन का स्तर बढ़ने लगता है। इसे ‘लव हार्मोन’ या ‘बॉन्डिंग हार्मोन’ भी कहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सकारात्मक सामाजिक संबंध तनाव को कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि कुछ लोगों के साथ सुकूनभरा अहसास होता है।
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बॉडी लैंग्वेज करती है काम

आपने महसूस किया होगा कि कई बार कोई व्यक्ति कम बोलता है, फिर भी उसकी संगति अच्छी लगती है। इसकी वजह केवल शब्द नहीं, बल्कि उसकी बॉडी लैंग्वेज, चेहरे के भाव, हाव-भाव और बोलने का तरीका होता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि संवाद का बड़ा हिस्सा इन्हीं माध्यमों से होता है। इसका एक कारण ‘इमोशनल कंटेजन’ भी है, यानी भावनाओं का एक-दूसरे पर असर और यही भावना आपको किसी से जोड़ देती है।

पहली छाप अंतिम नहीं

हालांकि पहली मुलाकात में बनने वाली राय कई बार सही साबित होती है, लेकिन विशेषज्ञ राय देते हैं कि केवल पहली छाप के आधार पर किसी व्यक्ति का पूरा आकलन नहीं करना चाहिए। परिस्थितियां, मनःस्थिति और समय के साथ लोगों का व्यवहार बदल सकता है। इसलिए रिश्तों को समझने और परखने के लिए धैर्य रखें।

मानसिक शांति का आधार

मनोवैज्ञानिक डॉ. एस. धनंजय बताते हैं, मन को शांति देने वाले लोग किसी जादू से नहीं, बल्कि अपने व्यवहार, संवेदनशीलता और सकारात्मक ऊर्जा से हमें प्रभावित करते हैं। जब कोई व्यक्ति हमें बिना डर, बिना निर्णय और पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करता है, तो हमारा मस्तिष्क और शरीर, दोनों ही सुरक्षित महसूस करते हैं। यही कारण है कि कुछ लोग जीवन में केवल रिश्ते नहीं बनाते, बल्कि मानसिक शांति का भी आधार बन जाते हैं।

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