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भागदौड़ भरी जीवनशैली में जब परिवार के मायने बदल जाएं

Thu, 28 Jun 2018 10:45 AM IST
शिवानी शर्मा
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परिवार के बीच प्यार और अपनापन बना रहे, इसके लिए पैसा या सुविधाएं अहम नहीं है। परिवार में खुशी और प्यार को आप अपने व्यवहार में बदलाव भी पा सकते हैं। हमारा घर एक ऐसा स्थान है, जहां हमें खुशी और सुकून मिलता है। लेकिन कई बार होता है कि परिवार में सुकून और शांति की जगह क्लेश और लड़ाई-झगड़े का माहौल बना रहता है और परिवार बिखरने लगता है। अगर आप चाहते हैं कि परिवार में खुशियां महकती रहें, तो कुछ बदलाव आपको अपने अंदर भी करने होंगे। 
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आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में परिवार के मायने बदलते जा रहे हैं। तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच हम परिवार की ओर ध्यान नहीं देते हैं। जब तक समझ आता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। देखा जाता है कि आजकल संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार का चलन बढ़ा है। एकल परिवार कुछ समय तक तो सुकून देता है, लेकिन जब हमें जरूरत होती है, तब हमें संयुक्त परिवार का असली अर्थ पता चलता है। परिवार के बीच प्रेम, एकता और शांति कायम करने के लिए कुछ बातों पर अमल करना जरूरी है। स्वार्थी होने के बजाय, खुद से पहले परिवार के सदस्यों के बारे में सोचें। अपने से पहले दूसरों के बारे में सोचेंगे, तो इससे परिवार के बीच आपका कद भी बढ़ेगा और परिवार में प्रेम भी। 
 

आपके कहे शब्द किसी को प्रोत्साहित भी कर सकते हैं और किसी को परेशान भी। अगर परिवार में किसी सदस्य से कोई गलती हो जाए, तो ऊंचे स्वर में बात करने या गलत बोलने के स्थान पर प्यार से समझाएं। इससे सामने वाले को अपनी गलती का अहसास भी होगा और उससे आपके रिश्ते भी मजबूत होंगे। ऐसा करने से परिवार के बीच आपसी समझदारी भी विकसित होती है।

सच बोलना एक ऐसा गुण है, जो हमें घर के साथ-साथ बाहर भी अपनाना चाहिए। कई बार सच बोलने पर हमें सामने वाले व्यक्ति के क्रोध का भी सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर तब, जब हमने कोई गलती की हो या अपने वादे को न निभाया हो। बावजूद इसके, सच बोलने से हम कई तरह की समस्याओं से बच जाते हैं और हमारा रिश्ता मजबूत रहता है। बुजुर्गों और बच्चों का सम्मान करना और उन्हें प्यार करना हमारे अच्छे शिष्टाचार को दिखाता है। इसके अलावा बड़ों से सम्मान के साथ बात करना, परिवार में किसी को जरूरत हो, तो उनकी मदद करना भी शिष्टाचार का ही हिस्सा है। 
 
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परिवार में खुशियां महकती रहें और आप भी तनावग्रस्त न रहें, इसके लिए माफ करें और भूल जाएं की नीति अपनाएं। किसी सदस्य ने गलती की है, तो उसे दिल से लगाकर न बैठें। अगर दिल से लगाए रहेेंगे, तो तनाव होगा और सामने वाले पर गुस्सा भी आएगा। माफ करके भूल जाएंगे, तो रिश्तों में सुधार होगा। घर में बहुत से काम होते हैं। उनको मिलकर पूरा करने में जो मजा है, वह किसी और में नहीं। घर के काम का बोझ अपनों से छोटे या किसी एक सदस्य पर न डालें। आप भी उसका हाथ बटाएं, क्योंकि आप परिवार के सदस्य हैं, तो आपकी जिम्मेदारी भी बनती है कि परिवार के सभी सदस्यों के बीच घर के काम की जिम्मेदारी बांट दें। 

आजकल के युवाओं की जीवनशैली में तेजी से बदलाव आया है। इस बदलाव के साथ व्यस्तता भी उतनी ही तेजी से बढ़ी है। कई बार स्थिति ऐसी बनती है कि घर के बच्चे कोई निर्णय लेने से पहले आपसे चर्चा नहीं करते। ऐसे में खुद को अनदेखा महसूस न करें। उनकी भागती-दौड़ती जीवनशैली की दिक्कतों को समझने का प्रयास करें। 
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