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Father's Day 2018: 13 ऐसे बाप, जिन्होंने बच्चों को दी ऐसी सीख, उन्होंने पा लिया एक मुकाम

Sun, 17 Jun 2018 04:50 PM IST
रूबी सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
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फादर्स डे
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फादर्स डे के मौके पर हम आपको सुना रहे हैं, उन पिताओं की कहानियां, जिन्होंने अपने बच्चों को ऐसी सीख दी कि उन्होंने सफलता का शिखर छू लिया।
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मां का प्यार और पिता के दुलार से ही बच्चे अपनी जिंदगी का पहला पाठ सीखते हैं। पिता को ही अपना रोल माडल बनाकर वे जिंदगी में लक्ष्य तय करते हैं। पापा के इसी दुलार को सेलीब्रेट करने का दिन 17 जून हैं यानि फादर्स डे, जिसको लेकर सिटी फादर्स डे सेलिब्रेशन से सजने लगी है।

कुछ अपने पिता के लिए सरप्राइज प्लान कर रहे हैं, तो कुछ अपने पिता की उनकी जिंदगी में एक रोल मॉडल होने की बात को सोच ही उत्साहित हैं। ये सभी अपने ही अंदाज से इस खूबसूरत दिन को मना रहे हैं। अमर उजाला संग सिटी की पहली लेडी डीएसपी हरजीत कौर से लेकर शहर के पहले फर्नीचर शोरूम मालिक बिजनेसमैन ने अपने पिता की उनकी जिंदगी में अहम रोल बयां किया।
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मेरे ससुर ने मेरी जिंदगी में निभाया एक पिता को रोल, वो मेरे गुरू

डीएसपी हरजीत कौर
चंडीगढ़ पुलिस विभाग में डीएसपी हरजीत कौर की एक सख्त आफिसर के तौर पर पहचान है। उन्होंने कई मुश्किल केस को हल किया है। वे सिटी की पहली महिला डीएसपी हैं। लेकिन उनकी इस सफलता के पीछे उनके ससुर मघर सिंह संधू का मार्ग दर्शन है, जो उनके लिए पिता समान हैं।

डीएसपी ने बताया कि 1990 में उनकी शादी के बाद से ही उनके ससुर ने उनका हर तरह से मार्ग दर्शन किया। एक पिता की तरह उन्होंने उनको हर पल राह दिखाई, जब भी वे कमजोर पड़ीं, उनके पिता ने एक बेटी की तरह उनका हाथ थाम उन्हें हौसला दिया।

हालांकि एक समय उनके पति ने उनको सर्विस छोड़ने के लिए कह दिया था, लेकिन यह उनके ससुर ही थे, जिन्होंने उनको ऐसा करने से मना किया। तब वे एएसआई के तौर पर यूटी पुलिस डिपार्टमेंट में कार्यरत थीं। उन्होंने कहा कि जब उनकी शादी हुई थी तब पुलिस महकमे में महिला पुलिसकर्मी को अच्छे तरीके से नहीं देखा जाता था।

लेकिन उनके ससुर ने हमेशा उनको गाइड किया। वे उनको अपना गुरू मानती है। उन्होंने बताया कि जब वे डीएसपी के तौर पर प्रमोट हुई तो उन्होंने उनके पिता ससुर को सबसे अधिक खुशी हुई। सेक्टर-11 निवासी डीएसपी ने बताया कि उनके ससुर ने पार्कमें सुबह सुबह मिठाई बांटी और उनको शगुन देकर आशीर्वाद दिया।

मैंने अपने पिता की विरासत से सीखा मेहनत करना, वो मेरे रोल मॉडल थे

अजय गुप्ता
सिटी की पहली बड़ी फर्नीचर शॉप ग्लास प्लेस के मालिक अजय गुप्ता अपने माडर्न फर्नीचर केलिए शहर के लोगों के दिल में खास जगह रखते हैं। ये एलिट क्लास से लेकर मिडिल क्लास के लोगों के लिए फर्नीचर बनाते हैं। इस सफलता केपीछे उनके पिता देवक राम गुप्ता का मार्ग दर्शन हैं। उनके पिता 1960 में रेहड़ी को लेकर खुद फर्नीचर लोगों के घर देकर आते थे।

अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत उन्होंने फिर सेक्टर-18 में एक छोटी दुकान शुरू की, जिसमें वे लोगों केलिए माडर्न फर्नीचर को खुद डिजाइन कर बेचते थे। अजय गुप्ता ने बताया कि उनकेपिता से ही उन्होंने मेहनत और लगन से काम करना सीखा। वे खुद तीन पहिया वाहन पर फर्नीचर दिया करते थे। उन्होंने बताया कि उनकेपिता उनके हमेशा रोल मॉडल रहे हैं।

बिजनेसमैन गुप्ता ने बताया कि यह मंत्र वे अपने बेटा एवं बेटी को दिया है। उन्होंने बताया कि 1960 से ही उन्होंने अपनी सफलता अपने पिता के मार्ग दर्शन के लक्ष्य बनाकर प्राप्त की। उनके बेटे वरूण और बेटी अंजना ने कहा कि उनकेपिता उनकेरोल माडल हैं।

खुद का अंधेरा नहीं बनने दिया बेटियां के लिए मजबूरी

परिवार के साथ जे एस प्यारा
इंस्टीट्यूट फार ब्लाइंड सेक्टर-26 के प्रिंसिपल जे एस ज्यारा बचपन से ही देख नहीं सके, लेकिन उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को कभी मायूसी से नहीं जीया। उनकी तीन बेटियां हैं, जो सामान्य हैं। तीनों ही हायर स्टडी कर रही हैं। उनकी एक बेटी एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं तो एक बेटी पंजाब यूनिवर्सिटी से एमए अंग्रेजी। उनकी तीनों बेटियों ने कहा कि उनके पिता ही उनकी जिंदगी के रोल माडल हैं। वहीं प्रिंसिपल ने फादर्स डे को इन पंक्तियां बेटा हो या बेटी हो, घर के दोनों उपहार होते हैं। जिंदगी को रोशन करते हैं।

वीडियो कॉल से करूंगी पापा को विश

पिता के साथ शिवानी तोमर
‘मैं इस बात को मानती हूं कि पिछले कुछ सालों में पिता की भूमिका में बदलाव आया है। वह दोहरी भूमिका निभाते हैं, एक तरफ तो जरूरत पड़ने पर बच्चों की गलतियों को छुपाते हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें यह भी समझाते हैं कि क्या गलत है। मेरे डैड ने मुझे सबसे अच्छा तोहफा दिया है, वह है स्वतंत्र होकर अपने फैसले खुद करने की सोच, जो मुझे लगता है कि सही है।

हमारे बीच दोस्तों जैसा रिश्ता रहा है, लेकिन साथ ही वह मेरे हमेशा ही सबसे बड़े आलोचक रहे हैं। मुझे एक छोटी-सी घटना याद है, मैं पांचवीं क्लास में थी। मेरे क्लास मॉनिटर ने मुझे चिढ़ाने की कोशिश की, उसने आकर मुझे सिर पर मारा। जब मैंने अपने डैड से उसकी शिकायत की तो अगले ही दिन वह मुझे बिना बताए स्कूल पहुंच गए और उसकी शिकायत मेरे टीचर से की।

उस उम्र में और उस स्थिति में मैंने कभी उनसे ऐसी चीज की उम्मीद नहीं की थी। यह सोचकर बहुत ही बुरा लग रहा है कि मैं उनके साथ फादर्स डे मनाने के लिए दिल्ली में मौजूद नहीं रहूंगी, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी मैं उन्हें वीडियो कॉल पर विश करूंगी और उनका आशीर्वाद लूंगी।
- शिवानी तोमर उर्फ ‘मिटेगी लक्ष्मण रेखा’ की कंचन

सुपरहीरो हैं मेरे पापा

एंकर प्रियांशु
मुझे याद है मेरे पापा हमेशा मुझसे कहा करते थे कि इस दुनिया में सबसे सुखद अहसास उस दिन हुआ, जब तुमने इतनी कम उम्र में अपने लक्ष्य को हासिल किया। हमारे बीच हमेशा एक खास रिश्ता रहा है। मुझे वह घटना याद है, जब हम राजस्थान में रहते थे और मैं अपने पापा से कार खरीदने को कहता था।

उन्होंने खुद को इन विचारों से दूर रखा और ऐसी चीजों पर यह कहकर मुझे खर्च करने से रोकते थे कि मैं कार के लिए पैसे नहीं बचा पाऊंगा। मुझे याद है कि मैंने उन्हें कुछ रुपये गिनते हुए देख लिया था और मैंने कहा कि आप मुझे बेवजह रोक रहे थे। अब, जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो खूब हंसते हैं।

मैं अपने डैड को सुपरहीरो मानता हूं, उन्हें ‘फैमिली मैन’ कहता हूं, क्योंकि वह खुद से अपने पैरों पर खड़े होने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने उस जगह से शुरुआत की है, जब उनके हाथ में कुछ भी नहीं था। लेकिन उन्होंने अपने परिवार वालों के लिए इतनी आरामदायक और ऐशो-आराम भरी जिंदगी खड़ी की। उनकी सुपर पावर सबको खुश करने और परिवार के लोगों की आरामदायक जिंदगी सुनिश्चित करने के लिए होगी।’
प्रियांशु जोरा, ‘हाई फीवर...डांस का नया तेवर में होस्ट

जब पापा ने पकड़ा था मुझे बंक मारने पर

युक्ति कपूर
मुझे एक घटना याद है, जब मैंने अपना स्कूल बंक किया था और दोस्तों के साथ मॉल गई थी। मेरे पापा ने मुझे वहां पकड़ लिया था और कुछ ऐसा किया जिसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी। चिढ़ने या गुस्सा होने की बजाय, उन्होंने बड़े प्यार से कहा था कि ब्रेक या छुट्टी के लिए स्कूल से बंक मारना ठीक है।

उस घटना ने पापा के प्रति मेरे नजरिए को पूरी तरह बदल दिया था और मुझे यह सिखाया था कि हमेशा सच बोलना चाहिए। इसके बदले में मैं अपने बच्चों को ईमानदार होना सिखाऊंगी और उन्हें बताऊंगी की इस बात कर चिंता ना करें कि दूसरे उनके बारे में क्या राय रखते हैं। मेरे पैरेंट्स जयपुर में रहते हैं और मैं मुंबई में रहती हूं और फादर्स डे पर उनके पास जाना संभव नहीं है।

इसलिए, मैं उनके लिये फूल और हाथों से लिखा एक खूबसूरत खत भेजूंगी। मैं उन्हें हर घंटे पर कॉल करने वाली हूं और उनसे कहने वाली हूं कि वह कितने अच्छे पिता है और पूरी दुनिया में उनके जैसा कोई नहीं। मैं सचमुच यह मनाती हूं कि काश मेरे पापा एक सुपरमैन होेते तो हम एक साथ पूरी दुनिया का सफर कर पाते।
- युक्ति कपूर उर्फ ‘अग्निफेरा’ की रागिनी

बच्चों को सिखाउंगा जो पिता से सीखा

अंकित गेरा
बीते जमाने के पैरेंट्स से अलग, जो यह बताया करते थे कि उनके बच्चों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं, मेरे पापा मुझ पर भरोसा करते थे और मैं जो भी करना चाहता था, उसके लिए कभी रोकते थे। वह मुझे गाइड करने और सलाह देने के लिए हमेशा मौजूद रहते थे।

मेरे ऊपर उनके विश्वास ने मुझे दृढ़ बनाया और मुझे यह अहसास कराया कि मुझे अपने पिता का सिर ऊंचा करना है। मैं हमेशा यही चाहूंगा कि मेरे बच्चे भी ऐसा ही महसूस करे। साथ ही अपने बच्चे पर भरोसा करो, यह बात उन्हें बताने वाला हूं। मैं इस बात पर यकीन करता हूं कि शब्द चीजों से कहीं ज्यादा ताकतवर होते हैं।

मैं उन्हें उनकी पसंद के फूलों का बहुत खूबसूरत गुलदस्ते के साथ केक भेजने वाला हूं। साथ ही अपनी भावना वीडियो कॉल और चिट्ठी में व्यक्त करने वाला हूं। उनके त्याग के उन सालों के बारे में याद करता हूं तो मैं कह सकता हूं कि वह अलग-अलग कॉस्ट्यूम में एक सुपरमैन हैं।
- अंकित गेरा उर्फ ‘अग्निफेरा’ के अनुराग

फादर्स-डे पर दूंगा म्यूजिकल पार्टी

नितिन गोस्वामी
मैं एक बेहद ही पारंपरिक रइस परिवार से ताल्लुक रखता हूं, जहां मेरे पिता अपने अंदाज में सबका सम्मान करते हैं। उन्होंने मुझे हमेशा अपने बड़ो का आदर करना सिखाया है। सबसे जरूरी चीज जो मेरे पिता ने मुझे सिखाई वह यह थी कि यदि कुछ भी गलत देखो तो उसके साथ खड़े रहो और उसका मुकाबला करो।

मैं चाहता हूं कि मेरे बच्चे भी यही बात सीखें, जो मुझे अपने पिता से सीखने को मिला है। उन्होंने मुझे अपना कैरियर चुनने का अधिकार दिया। इस फादर्स डे पर मैं एक म्यूजिक पार्टी देकर, सारे दोस्तों और उनके परिवारवालों को बुलाकर उन्हें सरप्राइज देना चाहूंगा इससे उन्हें निश्चित रूप से खास होने का अहसास होगा।

मेरे पिता एक सीआईडी ऑफिसर हैं और मैं हमेशा ही उन्हें ‘नायक’ फिल्म के अनिल कपूर की तरह देखता हूं। मेरे लिये मेरे पिता पहले से ही एक सुपरहीरो हैं, बल्कि मैं यह कहना चाहूंगा कि दुनिया के हर डैड सुपरहीरो हैं।’’
- नितिन गोस्वामी उर्फ ‘सिद्धिविनायक’ के विनायक

पिता ने हमेशा कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया

शुभांगी अत्रे
मेरे पिता ने मुझे हमेशा ही दयालु बने रहना सिखाया है और हर किसी के साथ उसी प्यार और सम्मान के साथ पेश आना चाहिए, जैसा कि मुझे परिवार से मिला है। मुझे लगता है कि यह बहुत ही बेहतरीन शिक्षा है और मैं अपने बच्चों को भी यही सिखाऊंगी। एक दयालु और विनम्र इंसान होने से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता है।

हम लोग तीन बहनें हैं और मेरे पिता है हम सबको राजकुमारी की तरह रखा और वैसा ही प्यार दिया है। वह हमेशा ही सपोर्ट करते थे और उन्होेंने हमेशा जीवन में कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया। मुझे नहीं लगता कि इतने प्यारे पैरेंट्स के लिए कोई एक खास दिन होना चाहिए। हमें हर दिन उनका शुक्रगुजार होना चाहिए। इसलिए, यह दिन भी मेरे लिए उससे अलग नहीं है।

मैं उन्हें रोज कॉल करती हूं और अपने हर दिन के बारे में बताती हूं, उनसे सलाह लेती हूं और इस दिन भी वैसा ही करूंगी। वह एक मजबूत आधार स्तंभ रहे हैं और वह इसी तरह बने रहेंगे। आज के दौर में एक पिता की भूमिका केवल पेट भरने वाले की नहीं होती है, बल्कि उससे कहीं ज्यादा होती है।

मुझे लगता है कि जिस तरह एक मां भावनाओं के निर्माण में समय लगाती है, उसी तरह आज के जमाने के पिता भी करते हैं। आज की पीढ़ी के पिता चीजों को बहुत ही अलग तरीके से करते है और यह वास्तव में एक सुखद बदलाव है।
- शुभांगी अत्रे उर्फ ‘भाबीजी घर पर हैं’ की अंगूरी भाबी

मेरे और पिता जी के बीच रहा है संगीतक रिश्ता

प्रकृति मिश्रा
मेरे पिता ने सबसे अहम बात जो सिखाई थी और आज भी मैं जिसका पालन करती हूं वह यह कि किसी और की तरह होने की कोशिश मत करो या अपने संघर्षों की तुलना किसी और से मत करो। वह कहते थे कि तुम्हें खुद से कमतर या ज्यादा नहीं होना चाहिए और दुनिया तुम्हें तुम्हारी वास्तविकता के साथ स्वीकार करेगी और तुम्हें प्यार करेगी।

मेरे पिता से जुड़ी मेरी ज्यादातर यादें संगीत से जुड़ी हैं, हम दोनों के बीच बेहद खास संगीतमय रिश्ता है। यह हमारे पूरे परिवार है, मेरी सबसे अच्छी यादों में उनके साथ परफॉर्म करना है। बदकिस्मती से इस फादर्स डे मैं उनसे नहीं मिल पाऊंगी, लेकिन उन्होंने मुझे पहले ही कह दिया है कि उन्हें अपना तोहफा मिल चुका है।

क्योंकि इस साल मैंने दो बड़ी सफलता हासिल की है। सबसे पहली ‘बिटट्ी बिजनेस वाली’ में रोल मिलना और दूसरी राष्ट्रीय पुरस्कार जीतना। उन्हें मुझ पर काफी गर्व है और मेरे लिये इससे ज्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है।’
- प्रकृति मिश्रा उर्फ ‘बिट्टी बिजनेसवाली’ की बिट्टी

पिता की आलोचना और मुश्किल वक्त दिखाना काम आया

राहुल शर्मा
मेरे डैड ने मुझे हमेशा यह सिखाया कि नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदलने और किस्मत का रुख अपनी ओर मोड़ने का, एकमात्र जरिया है कड़ी मेहनत। उन्होंने कभी भी मेरी आलोचना करने या मुश्किल वक्त दिखाने में संकोच नहीं किया और जीवन में काफी बाद में मुझे समझ आया कि यह कितना जरूरी था।

जीवन में सफलता पाने लिये उन्होंने बहुउपयोगी प्रेरणा दी और आज मुझे अपनी उपलब्धियों के बारे में बताने में गर्व महसूस होता है। जब मैं छोटा था तो मुझे याद है कि वह खेतों में लेकर जाकर कड़ी मेहनत करने के महत्व के बारे में बताया करते थे। वह फसल की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताते थे।

मैंने जो सफलता पाई है उसमें उनके सपोर्ट ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुझे खुशी है कि इस फादर्स डे पर मेरे पिता मुंबई में होंगे और हम इस मौके का फायदा पिता और बेटे के बीच दिल की बातों को करने में बिताएंगे। इस दिन को बेहद ही सामान्य रखने वाले हैं। मेरे पिता मेरे लिये सुपरहीरो हैं और मैं उनकी तुलना किसी भी अन्य हीरो से नहीं कर सकती।
- राहुल शर्मा उर्फ ‘मिटेगी लक्ष्मण रेखा’ के विशेष
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कई पल ऐसे जो संभालकर रखती हूं

सायंतनी घोष
मैं अपने पापा की लाडली बेटी हूं और एक व्यक्ति के तौर पर मुझमें उनकी झलक ज्यादा है। मेरी व्यवहारिकता, धैर्य और दृढ़ता की समझ उनसे ही मिली है। बचपन में मैं अक्सर अपना स्कूल बस छोड़ दिया करती थी और मेरे डैडी बड़े ही धैर्यपूर्वक अपने स्कूटर में बिठाकर स्कूल पहुंचा दिया करते थे।

उस समय तो मैं स्कूटर पर बैठने का विरोध किया करती थी, लेकिन आज जब उस समय को याद करती हूं तो वे पल संभालकर रखने वाले हैं। मैं एक दिन इसका जश्न मनाने पर भरोसा नहीं करती, क्योंकि उस इंसान की अहमियत पूरी जिंदगी रहती है। मैं उनके लिए और मेरे जीवन में उनके होने का जश्न साल के हर दिन मनाती हूं।

उनके चेहरे पर मुस्कान देखने के लिए, आज भी फूलों का गुलदस्ता ले जाना पसंद करूंगी। मेरे जीवन में मेरे पिता एक सुपरहीरो की तरह हैं और मैं नहीं चाहूंगी कि वह किसी और सुपरहीरो की तरह बनें।
- सायंतनी घोष
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