बच्चों की परवरिश का प्रभावी तरीका
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कुछ जिम्मेदारियां उसके हिस्से
आप अपने बच्चे के साथ कुछ छोटी-छोटी जिम्मेदारियां साझा करें। आप उसे कमरे की सफाई, टेबल पर खाना रखने, जूते खुद पॉलिश करने या पौधों को पानी देने जैसे सरल काम सौंप सकती हैं। जब बच्चे जिम्मेदारियां निभाते हैं तो उनसे कुछ गलतियां होती हैं, जो उन्हें निराश करती हैं, फिर वे और अधिक लगन से उस कार्य को करते हैं।
चुनाव की आजादी
आप जिम्मेदार पेरेंट्स की तरह बच्चे की रुचियों को जानें। उसे पढ़ाई करने के लिए कहें, लेकिन साथ-साथ उसकी रुचियों को भी आकार देने दें। आप बच्चे को चुनाव करने का मौका दें। उसके ‘चुनाव’ भविष्य में बहुत काम आएंगे।
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आप बदलें, बच्चे निखरें
आप बच्चे पर जोर-जबरदस्ती करने और उस पर चीखना बंद कर दें, क्योंकि इससे बच्चे न केवल जिद्दी बनते हैं, बल्कि उनका शारीरिक और मानसिक विकास भी प्रभावित होता है, जो आजीवन उन पर परिलक्षित होता है।
परफेक्ट जैसा कुछ नहीं होता
बाल विकास सलाहकार रोहिणी सेठी कहती हैं, पेरेंट्स को यह समझना होगा कि बच्चे और उनके बीच माता-पिता होने से भी ज्यादा एक रिश्ता है। किसी भी पेरेंट्स को बच्चे के प्रति प्यार की कोई शर्त निर्धारित नहीं करनी चाहिए। गलतियां अपनी जगह हैं, लेकिन वे प्यार करने या न करने की वजह न बनें। इस का बच्चे पर गहरा और आजीवन प्रभाव पड़ता है। पेरेंट्स को अपना एक दायरा तय करना चाहिए और बच्चे को गाइड करना चाहिए। हमेशा उनमें आत्मविश्वास भरने की कोशिश करनी चाहिए। ध्यान रहे, आपको बच्चे को एक प्यार से भरा हुआ इन्सान बनाना है, न कि ‘परफेक्ट पर्सन’, क्योंकि परफेक्ट जैसा कुछ नहीं होता।