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Cactus Friendship: आज की सबसे खास दोस्ती है कैक्टस फ्रेंडशिप, जानिए इसके फायदे

Mon, 13 Jul 2026 06:30 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Friendship Tips: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में दोस्ती कब सुकून से तनाव में बदल जाए, पता नहीं चलता। ऐसे में दोस्ती के रिश्ते को मजबूत और स्वस्थ बनाने में आपकी मदद करेगी ‘कैक्टस फ्रेंडशिप’।
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कैक्ट्स फ्रेंडशिप क्या है - फोटो : AI
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विस्तार
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प्रभा किरण

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आज के समय में जहां दोस्ती सोशल मीडिया पोस्ट, घंटों चैटिंग, कॉलिंग और दिखावटी होती जा रही है, वहीं कैक्टस फ्रेंडशिप ऐसी अनोखी, गहरी और अटूट दोस्ती बनकर उभर रही है, जिसमें आप रोज एक-दूसरे से बात न करें, मगर आपका रिश्ता मजबूत और स्थायी बना रहता है।

कम रख-रखाव की जरूरत

इसका नाम कैक्टस फ्रेंडशिप इसलिए रखा गया है, क्योंकि जिस तरह कैक्टस का पौधा बहुत कम पानी और देखभाल में भी हरा-भरा बना रहता है। ठीक उसी तरह इस दोस्ती में दोस्तों को एक-दूसरे से जुड़े रहने के लिए रोजाना बात करने की जरूरत नहीं होती है। दोस्ती का यह रिश्ता बिना किसी दबाव के निरंतर चलता रहता है। कैक्टस फ्रेंडशिप समय और दूरी की कसौटी पर पूरी तरह से खरी उतरती है। अगर आपकी सहेली दूसरे शहर या देश में है तो ये दूरी रिश्ते को कमजोर नहीं, मजबूत बनाएगी।
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भावनात्मक आत्मीयता की झलक

इस दोस्ती में भले ही दोस्त भौतिक रूप से दूर हों या कम मिलते हों, लेकिन उनके बीच भावनात्मक संबंध बेहद गहरा होता है। महीनों तक बात न होने के बावजूद जब आप फिर बात करते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे कोई दूरी आई ही नहीं। आपसी बातचीत में आत्मीयता साफ झलकती है। वहीं, लंबे समय बाद मिलने खुशी सबसे ज्यादा होती है।

कठिन समय में मजबूत सहारा

जब दोस्त पर बड़ा संकट आता है, तो सबसे पहले खड़े होने वाले यही ‘कैक्टस दोस्त’ होते हैं। ये बिना किसी दिखावे के आपकी ढाल बनकर साथ खड़े रहते हैं। इस रिश्ते में विश्वास इतना पक्का होता है कि यह अहसास हमेशा बना रहता है कि आपस में चाहे कितनी भी मुसीबत क्यों न आ जाएं, यह दोस्ती हमेशा बनी रहेगी और साथ देगी।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छी

यह दोस्ती बिना किसी हाई-मेंटेनेंस या इमोशनल डिमांड के होती है। इसका अर्थ है कि रिश्ते को सुचारू रूप से चलाने या खुश रखने के लिए बहुत अधिक समय, धन, ध्यान और देखभाल की आवश्यकता नहीं होती है। इससे आपकी मानसिक शांति हमेशा बनी रहती है।

मित्रता का आधार स्वार्थ नहीं, प्रेम

रिलेशनशिप काउंसलर शोभना बताती हैं, अब मित्रता के लिए अक्सर मुलाकात होने की अनिवार्यता समाप्त हो चुकी है। सहेली के साथ मानसिक ताल-मेल होना उसके साथ समय बिताने की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। अगर आपके संबंध स्वार्थ से प्रदूषित न हों तो उनमें कभी खटास नहीं पड़ सकती। अगर संबंध हार्दिक हैं तो चाहे कितने दिनों बाद भेंट हो, ऐसा लगेगा, जैसे आप कल ही मिली हों। दो परिपक्व व्यक्तियों की मित्रता परंपरागत औपचारिकताओं पर निर्भर नहीं होती है।

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