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Relationship Tips: शादी के बाद हर कपल को गुजरना पड़ता है इन 5 चुनौतियों से, आदर्श जीवनसाथी की होती है पहचान

Sun, 12 Jul 2026 09:01 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

जिंदगी जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक कई पड़ावों से गुजरती है। शादीशुदा जीवन में भी सुख-दुख, जिम्मेदारियां और चुनौतियां आती हैं, जहां पति-पत्नी का साथ, विश्वास और समझ ही रिश्ते को मजबूत बनाते हैं।
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शादी के बाद हर कपल को गुजरना पड़ता है इन 5 चुनौतियों से - फोटो : AI
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विस्तार
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सोनम लववंशी

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कई बार पति-पत्नी में अनबन हो जाती है और फिर मन में कई सवाल उमड़ने लगते हैं। हालांकि शादीशुदा जीवन में अक्सर ही ऐसे पड़ाव आते हैं, जहां अनबन हो जाती है, लेकिन इस दौरान जरूरत होती है- समझदारी, विश्वास और सहयोग की, फिर चाहे परिस्थिति कैसी भी हो। हर मोड़ पर साथ देने वाला जोड़ा ही आदर्श जीवन-साथी बन पाता है, लेकिन यह पड़ाव कौन से हैं?

आर्थिक संकट का दौर

शादी के शुरुआती वर्षों में नौकरी की अस्थिरता या व्यापार में नुकसान आर्थिक चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। ऐसे समय में मजबूत रिश्तों की पहचान पारदर्शिता और आपसी भरोसा होती है। जब दोनों बिना किसी छिपाव के साथ खड़े रहते हैं, तभी विश्वास की मजबूत नींव बनती है।
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संतान प्राप्ति और परवरिश

बच्चे का जन्म जीवन का सबसे सुंदर, लेकिन चुनौतीपूर्ण पड़ाव है। प्रसव पीड़ा, रात-रात जागना और पालन-पोषण में माता-पिता दोनों की समान भूमिका होती है, जिसे दोनों को निभाना है। अध्ययन बताते हैं, इस स्थिति में साथ निभाने वाले कपल्स में तलाक की दर 40 प्रतिशत कम होती है।

करियर की चुनौतियां

पति को पत्नी और पत्नी को पति की महत्वाकांक्षा का सम्मान करना चाहिए, भले ही इससे घरेलू संतुलन बिगड़ता हो। जिंदगी का यह पड़ाव ईर्ष्या या प्रतिस्पर्धा से बचने का सबक सिखाता है, जो रिश्ते को पारस्परिक विकास का माध्यम बनाता है।

वृद्धावस्था में

जीवन के अंतिम चरण में बीमारी या अकेलापन आ सकता है। आदर्श पति-पत्नी एक-दूसरे के सहारे पर चलते हैं। दवा समय पर देना, बातें करना और पुरानी यादें ताजा करना, यह सब महत्वपूर्ण होता है। पेंशन या बचत का साझा प्रबंधन भी यहां जरूरी है। जीवन के इस पड़ाव को प्यार से पार करना बेहद जरूरी है।

एक-दूसरे की भावनाओं को समझें

रिलेशनशिप काउंसलर अलका गलफट बताती हैं कि आदर्श पति-पत्नी का रिश्ता संकटों में सहयोग से मजबूत होता है। आर्थिक तंगी में पारदर्शिता, संतान परवरिश में संयुक्त जिम्मेदारी, करियर चुनौतियों में समर्थन, पारिवारिक बोझ में संतुलन और वृद्धावस्था में भावनात्मक सहारा, ये  पड़ाव रिश्ते की असली परीक्षा हैं। जो महिलाएं इनसे अकेले नहीं, पति के साथ गुजरती हैं, उनका वैवाहिक जीवन 80 प्रतिशत अधिक सुखी रहता है। इसलिए आप दोनों को अपनी भावनाओं को समझना सीखना चाहिए।

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