रहन-सहन की ट्रेनिंग
अनीता बताती हैं, "मैंने तो शादी के बारे में सोचना ही छोड़ दिया था लेकिन मनीष के आने से थोड़ी उम्मीद जगी थी। उसके माता-पिता मुझे नहीं अपनाते तो भी बुरा नहीं लगता। आखिर कोई क्यों अपने सिर बदनामी लेगा। लेकिन, धीरे-धीरे उन्होंने मुझे पूरी तरह अपना लिया। आज मेरी एक बेटी भी है और उसे एक इज़्ज़त भरी ज़िंदगी नसीब है।" मेरठ का कबाड़ी बाजार रेड लाइट एरिया है। यहां लड़कियों का सीटियां मारकर कस्टमर बुलाना आम बात है।
ऐसे में उन्हें कोई भी सामान्य लड़कियों से अलग पहचान सकता है। लेकिन, अब वहां से छुड़ाकर लाई गई कई लड़कियों के घर बस गए हैं। उन्हें रोज़गार देने के भी प्रयास किए गए हैं। वहां से निकाल कर अब ये संस्था इन लड़कियों को सामान्य रहन-सहन की ट्रेनिंग भी दे रही है। इसके लिए उन्हें कुछ दिन संस्था के वॉलेंटियर्स के घर रखा जाता है ताकि वो उस घर की महिलाओं से सामान्य रहन-सहन का तरीका सीख लें। अतुल शर्मा ने बताया कि कोठे पर लंबे समय तक काम करने वाली लड़कियों का उठना-बैठना, बोलना सब बदल जाता है। वह एक आम परिवार में रह सकें इसकी कोशिश की जाती है।