उसका नाम आकाश था
पता नहीं उसे कैसे ये गलतफहमी हो गई कि मैं एयरहोस्टेस हूं।चाहती तो उसे सच बता देती, लेकिन मुझे भी मजा आ रहा था।बचपन से सबको कहते सुना था कि मैं बहुत सुंदर हूं।दूध जैसा रंग, बड़ी-बड़ी आंखें, तीखे नैन-नक्श, छरहरी काया लेकिन घर वालों को तो शादी की पड़ी थी। जो पहला लड़का समझ में आया, उसी के साथ चलता कर दिया।लेकिन उस आदमी को न रोमांस से मतलब है, न मेरी भावनाओं से।मुझे लगता था कि शादी के बाद पति मुझे आंख भरकर देखेंगे, रूठूंगी तो मनाएंगे, सरप्राइज देंगे और कुछ नहीं तो सुबह मेरे लिए एक कप चाय ही बना देंगे! पर एकदम मशीन की तरह है उनकी जिंदगी - सुबह उठो, दफ़्तर चले जाओ। दस बजे आओ, खाना खाओ, सो जाओ।