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'हां, मैं गैर-मर्दों के साथ चैट करती हूं, तो?'

Fri, 11 Jan 2019 04:11 PM IST
मंजू ममगाईं बीबीसी हिंदी
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जब पहली बार फेसबुक पर उसका मैसेज आया तो चौंक गई थी। दिल धक्क से रह गया। पति घर पर नहीं थे फिर भी लगा कोई चोरी कर रही हूं। एक ऑनलाइन मैसेज को खोलने से पहले भी इधर-उधर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा।खुद पर हंसी भी आई। सोचा, 'कितनी बेवकूफ हूं, घर में अकेली बैठी हूं, किससे डर रही हूं।'उसने लिखा था - "हाई, मैं तुमसे फ्रेंडशिप करना चाहता हूं।''पढ़कर मुंह पर मुस्कुराहट आ गई फिर झेंप भी हुई।'एक अनजान आदमी के इंटरनेट पर आए मैसेज में क्यों दिलचस्पी लूं मैं?'

पति का ख्याल आते ही एक टीस सी उठी मन में, कोफ्त भी हुई।ये इनकी बेरुखी ही है कि एक अनजान आदमी का लिखा 'हाई' भी मेरे दिल में गुदगुदी कर सकता है।एक बार को शायद उसे जवाब ना भी देती लेकिन इन पर इतना गुस्सा था कि तुरंत लिख भेजा - 'हाई!'

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उसका नाम आकाश था

पता नहीं उसे कैसे ये गलतफहमी हो गई कि मैं एयरहोस्टेस हूं।चाहती तो उसे सच बता देती, लेकिन मुझे भी मजा आ रहा था।बचपन से सबको कहते सुना था कि मैं बहुत सुंदर हूं।दूध जैसा रंग, बड़ी-बड़ी आंखें, तीखे नैन-नक्श, छरहरी काया लेकिन घर वालों को तो शादी की पड़ी थी। जो पहला लड़का समझ में आया, उसी के साथ चलता कर दिया।लेकिन उस आदमी को न रोमांस से मतलब है, न मेरी भावनाओं से।मुझे लगता था कि शादी के बाद पति मुझे आंख भरकर देखेंगे, रूठूंगी तो मनाएंगे, सरप्राइज देंगे और कुछ नहीं तो सुबह मेरे लिए एक कप चाय ही बना देंगे! पर एकदम मशीन की तरह है उनकी जिंदगी - सुबह उठो, दफ़्तर चले जाओ। दस बजे आओ, खाना खाओ, सो जाओ।

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relationship

गले लगाने में कितना वक्त लगता है?

ऐसा नहीं है कि मुझे समझ नहीं आता कि वो मसरूफ हैं लेकिन अपनी पत्नी को प्यार से निहारने या उसे गले लगाकर प्यार के दो शब्द बोलने में कितना वक़्त लगता है! लेकिन मेरे पति में या तो ऐसी भावनाएं ही नहीं हैं और या फिर उन्हें जाहिर करना उनकी मर्दानगी को सूट नहीं करता।सेक्स कर लेंगे, लेकिन रोमांस नही। एक साल की शादी में हमने आज तक फोरप्ले नहीं किया! मैं कितना भी अच्छा खाना बना दूं, घर को कैसा भी रखूं, कभी तारीफ का एक शब्द नहीं बोलते। पूछो तो कह देंगे 'ठीक है'।इन्हीं सब ख्यालों में खोई हुई थी कि आकाश ने दोबारा पिंग किया। वो मेरी फोटो देखना चाहता था।इंटरनेट की दुनिया मेरे लिए नई थी।फेसबुक पर अकाउंट भी इन्होंने बनाया था।फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करना भी इन्होंने ही सिखाया था लेकिन फोटो डालने से डर लगता था।सबको कहते सुना था कि लोग इंटरनेट से फोटो चुराकर पॉर्न साइट्स पर डाल देते हैं लेकिन आकाश मुझे देखने के लिए बेचैन था।कुछ दिन तक मैंने टालमटोल की फिर उसे बता दिया कि मैं वो एयरहोस्टेस नहीं हूं।

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'मुझे लगा कि अब वो चला जाएगा'

लेकिन उसने और ज़्यादा जिद पकड़ ली।भेज भी देती पर एक भी ढंग की फोटो नहीं थी मेरे पास! आकाश खुद भी शादीशुदा था।तीन साल का बेटा था उसका मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था।विदेश जाता रहता था।खूब पार्टियां होती थीं जिनमें लड़कियों का सिगरेट-शराब पीना आम बात थी। मेरे लिए ये नई तरह का रोमांच था।उसकी पत्नी भी किसी बड़ी कंपनी में काम करती थी।उसने बताया कि वे एक-दूसरे को ज़्यादा वक़्त नहीं दे पाते।

एक दिन बोला कि "मैं आज बहुत दुखी हूं और मेरी पत्नी इसलिए बात नहीं कर पाई कि वो मीटिंग में है।"मैं उसका दर्द समझ सकती थी।हम रोज बात करते। बहुत मजा आता था।यह सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था। एक समय तो ऐसा आया कि मुझे सुबह से ही एक्साइटमेंट होने लगता कि जल्दी से काम खत्म करूं तो बात करेंगे।

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एक दिन बोला "वेबकैम पर आओ।" मैं घबराकर ऑफलाइन हो गई, लगा मैं तो अभी नहाई भी नहीं। ऐसे देखेगा तो क्या सोचेगा लेकिन अब उसने मुझे देखने की रट पकड़ ली थी।कुछ समझ नहीं आया तो मैंने उसे अवॉइड करना शुरू कर दिया।उसके ऑनलाइन होने के समय मैं ऑफलाइन हो जाती। कुछ दिन ऐसा चला फिर एक दिन चिढ़कर उसने मुझे ब्लॉक कर दिया।

हमारा कोई रिश्ता नहीं था लेकिन फिर भी उसका जाना मेरी जिंदगी को और खाली बना गया।खुद पर गुस्सा आने लगा कि मैं नौकरी क्यों नहीं करती। पैसे कमाती तो अपनी मर्जी से फैसले ले सकती थी।इसके बाद कुछ समय तक मैंने किसी से बात नहीं की, लेकिन दिमाग में हमेशा आकाश की बातें घूमती रहतीं। याद आता कि उसके साथ दिन कितनी जल्दी गुजर जाता था।बेवजह मुस्कुराती रहती थी।देखा जाए तो इसका सबसे बड़ा फायदा मेरे पति को मिला।उनके कुछ किए बगैर ही मेरी जिंदगी का वो गैप भर गया जो उन्हें नजर नहीं आता था और सोचा जाए तो मैं कुछ गलत तो कर नहीं रही थी। न मैंने किसी को धोखा दिया, न किसी गैर मर्द के साथ सोई। बस बातचीत की जिससे मुझे याद रहे कि मैं सिर्फ किसी की पत्नी नहीं बल्कि एक इंसान भी हूं जिसकी अपनी कुछ जरूरतें हैं।अब क्या करूं, क्या नहीं, इसी असमंजस में कुछ दिन और गुजर गए।फिर एक दिन ऐसे ही एक लड़के का प्रोफाइल दिखा। शक्ल-सूरत अच्छी थी। पता नहीं मेरे दिमाग में क्या आया कि मैंने उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी।

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