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आपकी पर्सनल टेंशन भी है बॉस का सिरदर्द

Wed, 30 Mar 2016 03:01 PM IST
चाना आर स्कोनबर्गर/ बीबीसी
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- फोटो : getty images
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अक्सर लोग एक दूसरे को मशविरा देते हैं कि निजी जिंदगी और दफ्तर के काम को अलग रखें। निजी जिंदगी की दुश्वारियों का असर, हमारे काम पर नहीं पड़ना चाहिए। और काम की फिक्र, घरेलू जिंदगी पर हावी नहीं होनी चाहिए। मगर, कई बार हम ऐसे हालात से दो-चार होते हैं, जब हमारे सहयोगी निजी जिंदगी की दिक्कतों से परेशान होते हैं और उनकी इस परेशानी का काम पर असर साफ दिखने लगता है। खास तौर से जो टीम लीडर होते हैं, बॉस होते हैं, उनके लिए ये फिक्र की बात है कि उनकी टीम के लोग निजी जिंदगी की किसी दिक्कत के चलते अच्छे से काम नहीं कर पा रहे। इसका असर पूरी टीम के परफॉर्मेंस पर पड़ता है।
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तो, अगर ऐसा हो कि आपकी टीम की कोई सदस्य, ऐसी परेशानी से जूझ रहा या रही हो, तो किसी बॉस को क्या करना चाहिए? पहले तो ये जान लें कि इस मामले के तीन पहलू हैं। एक तो यह कि आपका सहयोगी बहुत बुरे दौर से गुज़र रहा है। दूसरा यह कि इसका असर उसके काम पर पड़ रहा है। और, तीसरा सबसे अहम पहलू यह कि वो इस मुश्किल वक्त में दफ्तर में किसी से मदद भी नहीं मांग पा रहा। तीसरा पहलू किसी भी बॉस के लिए बेहद चिंता का विषय है। यह किसी भी संस्थान के माहौल की बहुत खराब तस्वीर दिखाता है। यानी आपके दफ़्तर का माहौल ऐसा है कि लोग जिंदगी की दिक्कतों के बारे में एक-दूसरे से बात करने से कतराते हैं।

आपकी पर्सनल टेंशन भी है बॉस का सिरदर्द

- फोटो : getty images
इसका सीधा मतलब यह है कि आपने लोगों को ये संदेश दिया है कि वो निजी और ऑफिस की जिंदगी को बिल्कुल अलग रखें। आपको करना यह चाहिए कि आप बेहद अंतरंग और गोपनीय बातों की दफ्तर में चर्चा करने से रोकें।

शिकागो यूनिवर्सिटी के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस के जॉन पॉल रॉलर्ट कहते हैं कि लोगों को अंतरंग बातें, दफ्तर में करने से रोका जाना चाहिए, न कि निजी जिंदगी की हर परेशानी छिपाने को बढ़ावा देना चाहिए। 

जैसे बच्चे को टीका लगवाने में आ रही दिक्कत, या सोसाइटी की परेशानी। ये वो मसले हैं जिन पर दफ्तर में चर्चा से कोई नुकसान नहीं। तो, अगर किसी बॉस को दिखता है कि उसकी टीम का सदस्य निजी जिंदगी की परेशानी से जूझ रहा है तो सबसे पहले उसे अपनी कंपनी के नियम कायदों के बारे में पता करना चाहिए। एचआर टीम से बात करके तय करना चाहिए कि उस टीम के सदस्य की कैसे मदद की जा सकती है।

फिर इस तरीके से उस परेशान कर्मचारी से बात करनी चाहिए, जिससे ये न लगे कि आप उसकी निजी जिंदगी में दखल दे रहे हैं। थोड़ा वक्त निकालकर उससे अकेले में बात करें। उसे ये जताएं कि आप उसकी मदद करना चाहते हैं। अपनी परेशानियों के बारे में वो जो भी बताए, उसे ध्यान से सुनें। फिर उसको ये बताएं कि यह उसके लिए तकलीफदेह है और कंपनी के लिए नुकसानदेह।
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आपकी पर्सनल टेंशन भी है बॉस का सिरदर्द

- फोटो : getty images
रॉलर्ट सलाह देते हैं कि आप 'थ्री सी' के फॉर्मूले पर अमल करें। आप ये जताएं कि आपको अपने उस सहयोगी की परवाह है। फिर आप ईमानदारी से उसकी परेशानी सुनें और उसको ये भी बताएं कि उसके बर्ताव का असर, टीम के परफॉरमेंस पर पड़ रहा है। तीसरा यह कि सारी बातचीत पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। आप अपने उस सहयोगी को पूरी बात बताने के लिए मजबूर नहीं कर सकते, जो वह नहीं बताना चाहती या चाहता।

लेकिन, मिसाल देकर उसको ये बताएं कि वो अगर किसी उलझन में है तो इससे टीम के काम पर किस तरह असर पड़ा। कई बार होता यह है कि लोगों को अहसास नहीं होता कि अगर वो परेशान हैं तो इससे टीम को किस तरह नुकसान हो रहा है। अक्सर परेशान लोग अपनी आंखों पर पट्टी सी बांध लेते हैं।

मुसीबतजदा लोगों का ये बर्ताव आम है। उससे बात करने के बाद अगर आपके पास उसके मसले का हल है तो सुझाएं। उसको यह बताएं कि आप ऑफिस की जिम्मेदारियां घटाकर उसकी मदद कर सकते हैं। उसको किसी स्पेशलिस्ट की मदद दिला सकते हैं तो वह भी बताएं। कंपनी की तरफ से उसे क्या मदद मिल सकती है, इसकी भी उसे जानकारी दें।

जानकार कहते हैं कि आपको अपने सहयोगी से ये बातें वक्त रहते कर लेनी चाहिए। इसमें देर नहीं करनी चाहिए, वरना हालात बेकाबू हो सकते हैं। ये टीम लीडर के तौर पर आपकी बहुत बुरी छवि पेश करेगा। कंपनी की बदनामी होगी, सो अलग।
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