"मेरा नया बॉस मेरे साथ फ़्लर्ट कर रहा था," मेरी एक दोस्त ने मुझे पिछले हफ्ते बताया। "मैंने उसे भाव नहीं दिया तो वो मुझसे नाराज़ हो गया। अब इस वजह से मेरे उसके साथ प्रोफेशनल रिश्ते पर फ़र्क पड रहा है।
मेरी फ्रेंड, एक मैनेजमेंट प्रोफेशनल है, और उसका कहना है, "यह बहुत ही पेचीदा स्तिथि बन जाती है। अगर मैं भी अपने बॉस के साथ फ़्लर्ट करूँ, तो वो मेरे उसूलों के खिलाफ होगा। लेकिन अगर फ़्लर्ट ना करूँ, तो कम से कम इस ऑफिस में तो मेरे काम और करियर पर फ़र्क पड़ेगा।"
यह पिछले कुछ महीनो की बात है की मेरी दोस्त के ऑफिस में नए बॉस की नियुक्ति हुई। "वो जवान है, स्मार्ट भी, समझदार भी और अपने काम में बहुत अच्छा भी। मैं खुद उसकी प्रशंसा करते नहीं थक रही थी," उसने मुझे कहा।
क्यूंकि मेरा नया बॉस मेरी दोस्त का सीनियर है, इसलिए उन दोनों ने बहुत सारे प्रोजेक्ट्स में साथ काम किया। "मैं दिन का अधिकतर समय उसी के साथ बिताती थी। हम सुबह 8 बजे काम शुरू करते थे और कई बार 12 घंटे तक लगातार काम करते थे। हमारा काम के तौर पर बहुत ही 'पास'' वाला रिश्ता था," मेरे दोस्त ने कहा।
फ़्लर्टइंग से शुरुआत
सिर्फ प्रोफेशनल (काम के तौर पर) हमारी नजदीकी मेरे लिए चिंता का कारण नहीं था। "एक या दो हफ्ते बाद, उसने मुझे फ़्लर्ट वाले मेसेज भेजने शुरू किये।
वो अपने ऑफिस में बैठे- बैठे मुझे SMS भेजता, जैसे की, "आज तुम बहुत ही सुन्दर लग रही हो", या "जो परफ्यूम तुमने लगाया हुआ है बहुत ही अच्छा है।"
मेरी दोस्त ने उन SMS का जवाब बहुत ही सहजता के साथ दिया। "मैं हमेशा या तो 'थैंक यू' बोलती और ये भी लिख कर भेजती की "तुमने भी आज बहुत अच्छी शर्ट पहनी है", मुझे ऐसा कहने में कोई परेशानी नहीं लगती थी," उसने कहा।
ऑफिस के बाहर मिलना
जल्द ही उस नए बॉस ने मेरी दोस्त को कॉफ़ी, लंच और डिनर के लिए ऑफिस के बाहर बुलाना शुरू किया। "वो ऐसा था जैसे की हम डेट पर जा रहे हों। हम इस तरह की डेट के दौरान काम के बारे में तो बात करते थे लेकिन इसके अलावा और भी बहुत कुछ।
एक दिन मुझे एहसास हुआ की, शायद इन सब में कुछ गड़बड़ था," उसने मुझे समझाते हुए कहा। मेरी दोस्त का डर सच में तब बदल गया जब उसके बॉस ने उससे कहा की वो ऑफिस में किसी को भी उनकी इन मुलाकातों के बारे में ना बताये।
"ऑफिस में किसी को भी हमारी इन मुलाकातों के बारे में नहीं पता था। और उसने मुझे इस बारे में किसी से भी बात करने से मना कर दिया। मैंने सिर्फ हामी भर दी क्यूंकि मुझे कुछ और समझ ही नहीं आया," मेरी दोस्त ने कहा।
'ना' कहना
मेरी दोस्त ने इन मुलाकातों के लिए 'ना' कहना शुरू कर दिया और उसके बॉस ने इस पर कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दी। "वो बस थोडा अलग-अलग रहने लगा - ऐसे जताता था जैसे की मैंने उसे अस्वीकार दिया हो। वो इस बात को बहुत ही व्यक्तिगत तौर पर लेने लगा और इस वजह से उसके साथ मेरे प्रोफेशनल रिश्ते पर भी असर पड़ने लगा," मेरी दोस्त ने कहा।
अब मेरी दोस्त का नया बॉस बाकि कर्मचारियों पर ज्यादा ध्यान देने लगा था। "उसने मेरी कुछ जिम्मेदारियां मुझसे छीन कर बाकी कर्मचारियों को दे दी, वो भी जो मुझसे औहदे में छोटे थे। अब मुझे लगता है की क्या मैंने उसके साथ अकेली मुलाकातों पर जाने से मना करके कहीं गलत तो नहीं किया," मेरी दोस्त ने कहा।
मेरे लिए यह स्तिथि एक 'बुरी तरह फसने' वाली स्तिथि की तरह थी। अब तू क्या करेगी?, मैंने अपनी दोस्त से पुछा। "ह्म्म्म्म्म्म्म, मैं इस बारे में बहुत देर से सोच रही हूँ और सच कहूँ तो सोच-सोचकर मेरा दिमाग थक गया है। बस यह आशा है की इस अँधेरे से निकलकर कोई रोशनी की किरण दिखे।"