इंसानों के सबसे नैचुरल बिहेवियर पर एक साइक्लॉजी किताब आई है जिसे शायद हर कोई पढ़ना चाहे। ये किताब रोजाना बाथरूम जाने की क्रियाओं पर आधारित है।
अक्सर जब कोई बाथरूम जाता है तो गैस पास हो ही जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं ये कोई मजाक नहीं बल्कि एक सीरियस साइड है जो कि साइक्लॉजी से जुड़ी है।
Psychology in the Bathroom है किताब का नाम
ये हम नहीं कह रहे बल्कि डेली मेल पर प्रकाशित खबर के मुताबिक, इस बुक में कुछ ऐसी ही बातें लिखी हैँ। इस किताब में बाथरूम में फार्ट से संबंधित फैक्ट्स, फिगर और थ्योरी के बारे में कुछ चीजें सामने आई हैं।
इस किताब का नाम है 'Psychology in the Bathroom'। बाथरूम में साइक्लोजी को लेकर और टॉयलेट रिलेटेड बिहेवियर, कॉन्स्टिपेशन (कब्ज) जैसी चीजों के बारे में इस किताब में लिखा गया है।
रिसर्च करके लिखी गई है ये किताब
बेशक, इस किताब के विषय की टोन थोड़ी हास्य है लेकिन इसमें वैज्ञानिक दृष्टि से कई महत्वपूर्ण पहलूओं को उठाया गया है।
किताब के मुताबिक, कॉन्स्टिपेशन कुछ खास पर्सनेलिटी वाले लोगों को होता है। किताब में इस बात पर गंभीर तौर पर विचार किया गया है कि क्यों हम टॉयलेट हैबिट्स के बारे में शर्म महसूस करते हैं। इस किताब में टॉयलेट हैबिट्स और कुछ इसी तरह की डर्टी हैबिट्स के बारे में सवाल उठाए गए हैं।
किसने लिखी है ये किताब
इस किताब को मेलबर्न यूनिवर्सिटी के साइक्लोजी हेड और प्रोफेसर निक हसलम ने लिखा है। साथ ही 'Psychology in the Bathroom' में टॉयलेट संबंधी गाली गलौच, इरोटिक यूरिनेशन चीजों के बारे में भी खोजबीन की गई है।
ब्रेकिंग वाइंड पर की गई है खूब रिसर्च
'Psychology in the Bathroom' में एक पूरा चैप्टर ब्रेकिंग वाइंड (फार्ट) पर आधारित है। इस चैप्टर में बताया गया है कि जब गैस पास होने की आवाज पोलाइट होती है तो यह एक्सीडेंटल होता है। परिचितों के बीच साइलेंट और बिना गंध के फार्ट आने से परिचितों के बीच काफी अप्रिय हो जाता है। लेकिन अजनबियों के बीच लाउड फार्ट बेहद इमबैरेस करने वाला होता है।
हालांकि इन सबके बारे में डिटेल देते हुए बताया गया है कि इस मामले में हैरान नहीं होना चाहिए क्योंकि ये नैचुरल कॉल होती है।
किन लोगों को आती है ज्यादा पू
इन सबके अलावा इस किताब में एक चैप्टर है 'The Anal Character'। इस चैप्टर के लिए भी रिसर्च की गई है। किताब में ये भी बताया गया है कि किस तरह की पर्सनेलिटी वाले लोगों को पू ज्यादा आती है।
इस किताब में कई पूरानी रिसर्च को लेते हुए कई चीजों को विस्तार से बताया गया है। साथ ही इस किताब के लिए कई रिसर्च भी की गई।
किताब के लेखक प्रोफेसर निक ने इंसानों के स्वेरिंग हैबिट के बारे में भी बात की गई है। साथ ही बताया गया है कि ये टॉयलेट हैबिट से मिलता-जुलता है। इसी तरह की कई और चीजों पर इस किताब में लिखा गया है।