Independence Day 2025: 15 अगस्त भारत के लिए गर्व और आजादी का सबसे बड़ा पर्व है। इस दिन हर भारतीय तिरंगे के सामने खड़ा होकर राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' गाता है। यह मूल रूप से रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित बांग्ला गीत "भारतो भाग्य बिधाता" का पहला छंद है। इस गीत को पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। बाद में इसे 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने स्वीकार किया था। राष्ट्रगान के सम्मान के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं।
राष्ट्रगान के नियम
- राष्ट्रगान जब गाया अथवा बजाया जा रहा हो तब हमेशा सावधान की मुद्रा में खड़े रहना चाहिए।
- राष्ट्रगान का उच्चारण सही होना चाहिए तथा इसे 52 सेकेंड की अवधि में ही गाया जाना चाहिए। इसके संक्षिप्त रूप को 20 सेकेंड में गाया जाना चाहिए।
- राष्ट्रगान जब गाया जा रहा हो तब किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं करना चाहिए। उस समय अशांति, शोर-गुल अथवा अन्य गानों तथा संगीत की आवाज नही होनी चाहिए।
- शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रगान होने के बाद दिन की शुरुआत करनी चाहिए।
- राष्ट्रगान के लिए कभी अशोभनीय शब्दों का उपयोग नही करना चाहिए।
- यदि राष्ट्रगान किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री में बजाया जाता है, तो दर्शकों को खड़े होने की आवश्यकता नहीं है।
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अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा भी पूरे आत्मविश्वास और सही उच्चारण के साथ राष्ट्रगान गा सके, तो अभी से उसे सिखाना शुरू करें। यहां पढ़े राष्ट्रगान जन-गण-मन के बोल...
राष्ट्रगान
जन-गण-मन अधिनायक जय हे
भारत भाग्य विधाता।
पंजाब-सिन्धु-गुजरात-मराठा
द्राविड़-उत्कल-बंग।
विध्य हिमाचल यमुना गंगा
उच्छल जलधि तरंग।
तब शुभ नामे जागे, तब शुभ आशिष मांगे
गाहे तब जय-गाथा।
जन-गण-मंगलदायक जय हे भारत भाग्य विधाता
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे।।