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लिव इन रिलेशनशिपः मीठे पल का 'कड़वा फल'

Mon, 24 Jun 2013 08:53 AM IST
अनुराधा गोयल
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देश में शादी से पहले सेक्स को लेकर भले ही अलग-अलग राय हो, लेकिन हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट ने प्री-मेरिटल सेक्स यानी लिव इन रिलेशनशिप की अवधारणा को नया मोड़ दिया है।
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मद्रास हाई कोर्ट ने व्यवस्था की है कि अगर कोई गैर-विवाहित जोड़ा वयस्क है और उन दोनों के बीच यौन संबंध बनते हैं, तो इसे वैध शादी माना जाएगा और उन दोनों को पति-पत्नी कहलाने का हक होगा।

अगर ऐसा कोई जोड़ा यौन इच्छाओं को पूरा करने के लिए कदम बढ़ाता है, तो इसके नतीजों को स्वीकार करते हुए यह पूर्ण प्रतिबद्धता माना जाएगा। हालांकि, कुछ मामलों में अपवाद जरूर हो सकता है।
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कोर्ट के इस फैसले पर कुछ संस्थाएं नाराज हुई तो कुछ ने इसका समर्थन किया। ऐसे में ये सवाल उठना भी लाजमी है कि लिव इन रिलेशन के दौरान पैदा हुए बच्चे की स्थिति क्या होगी?

इसी सवाल का जवाब जानने के लिए अमर उजाला ने हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद जैन से बातचीत की। इन्होंने साफ-साफ कहा कि अगर लिव इन रिलेशनशिप में बच्चा पैदा होता है तो उसके मां बाप के अलग होने के बाद भी बच्चे को पिता का नाम मिलेगा?

यहां तक कि अगर बच्चा चाहे तो पिता की संपत्ति में उसका भी हक होगा। जैन ने एनडी तिवारी मामले का भी हवाला दिया जिसमें डीएनए रिपोर्ट के आधार पर पैतृत्व का फैसला किया गया।

अमर उजाला ने लिव इन के प्रभाव और इस रिश्ते से पैदा होने वाले बच्चे की मानसिक स्थिति को लेकर रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ.नीलम सक्सेना से बात की। डॉ.नीलम ने कहा कि बात अगर कानून की है तो कितने लोग कानून के प्रति जागरूक होते हैं।

वे आगे कहती हैं कि बहुत कम फीसदी लोग ही कानून की जानकारी रखते हैं बाकी लोग कानूनी दांवपेचों से बचते हैं।

डॉ.नीलम का कहना है कि आमतौर पर इस रिश्ते का कोई भविष्य नहीं है। हां, शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए लिव इन सबसे आसान रिश्ता है।

इस रिश्ते के नुकसान बताते हुए डॉ. कहती हैं कि इस रिश्ते में परिवार और अन्य रिश्तेदार साथ नहीं रहते। उनके पास कुछ ऐसे केस आए जिनमें पीड़ित लिव इन में रह रहे थे।

एक केस में 31 वर्षीय नेहा (बदला नाम) चार साल से लिव इन में रह रही थी। लड़की प्रेगनेंट हो गई और उसके 8 महीने की बेटी भी है। उसका लिव इन पार्टनर उसे ये कहकर छोड़ गया कि लड़की के संबंध कई और लोगों के साथ हैं।

एक केस में 29 वर्षीय कंचन (बदला नाम) अपने पार्टनर के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रही थी, 8-10 महीने लिव इन में रहने के बाद लड़का लड़की को अपने दोस्तों के साथ रिलेशन बनाने पर मजबूर करने लगा। इससे दोनों का रिश्ता टूट गया।
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डॉ. का कहना है कि इन स्थितियों को देखते हुए लिव इन के दौरान आप इन बातों का ध्यान रखें-
- अपनी परेशानी हर किसी के आगे ना गाए।
- अपनी तकलीफों का सोल्यूशन खुद निकालें।
- आंख बंद करके किसी पर विश्वास ना करें।
- भावनाओं में न बहें।
- लिव इन रिलेशन का मतलब ये नहीं कि सेक्स संबंध बनाए जाएं।

डॉ. के मुताबिक लिव इन रिलेशन के कई नुकसान भी हैं।
-लिव इन के दौरान असुरक्षा की भावना मन में रहती है।
-अगर इस रिश्ते के दौरान बच्चा होता है तो बच्चे की मानसिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
-आमतौर पर बच्चों को भविष्य हेल्दी नहीं होता।
-बच्चे को कई तरह के पर्सनेलिटी डिसऑर्डर होने का डर रहता है।
-बच्चे में आत्मविश्वास की कमी होती है।
-बच्चे के क्रिमिनल माइंडेड होने की संभावना बढ़ जाती है।
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