यूं भी प्यार जताने के लिए लोग गले मिलते हैं लेकिन अगली बार जब आपका पार्टनर आपके साथ चिपक कर सोने से इंकार करे या फिर बहाने बनाए तो उसे ऐसा नहीं करने दें। क्या आपको मालूम है कि लिपट कर सोने के कई फायदे हैं।
जी हां, गले लगने या लिपटने के अपने ही कई फायदे हैँ। आइए जानें ऑनलाइन शेप के मुताबिक, लिपटने के पांच फायदे।
अच्छेपन का एहसास
लिपट कर सोने से ऑक्सीटोन नाम का हार्मोन निकलता है जो कि फील गुड हार्मोन है। 'ए हैप्पी यू: योर अल्टीमेट परसेप्शन फॉर हैप्पीनेस' नामक पुस्तक की लेखिका, मनोवैज्ञानिक और फिजिकल थेरपिस्ट एलिजाबेथ लोम्बार्डो का कहना है कि ऐसा करने से ख़ुशी में इजाफा होता है।
डॉ रेने होवोविट्ज़ जिन्होंने हाल में सेंटर फॉर सेक्सुअल वैलनेस खोला है, का कहना है कि चिपक कर सोने, स्पर्श और सेक्सुअल प्ले से दिमाग में ऑक्सीटोसिन निकलता है जो ख़ुशी का एहसास दिलाता है। चिपक कर सोने से एंडॉर्फिन्स भी निकलता है जो अच्छे वर्कआउट या चॉकलेट खाने के बाद निकलता है।
यह आपको सेक्सी बनाता है
चिपक कर सोने से शारीरिक संपर्क होता है जिससे सेक्स की भावना पनपती है। चिपक कर सोने का अंजाम सेक्स तक हो सकता है। इसकी वजह से डोपामाइन नामक हार्मोन विकलता है जो सेक्स करने की इच्छा को जगाता है। वैसे भी प्रयोगों से साबित ही चुका है कि शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्तरों पर सेक्स फायदेमंद है।
तनाव और ब्लड प्रेशर में कमीं
स्ट्रेस मैनेजमेंट कोच और होलिस्टिक थेरपिस्ट कैथरीन कोनोर्स का कहना है कि शारीरिक संपर्क से तनाव में कमी आती है। गले लगना, चूमना या फिर अन्य शारीरिक हैकटों से ऑक्सीटोसिन के लेवल में वृद्धि होती है। इस हार्मोन को बॉन्डिंग हार्मोन कहते हैं। इस रासायनिक प्रतिक्रिया से न केवल ब्लड प्रेशर में कमीं आती है बल्कि ह्रदय की बीमारियों का खतरा भी कम होता है।
बच्चे और पार्टनर से बॉन्डिंग
जाने- माने डॉ फ्रान वेलफिश का कहना है कि चिपकना लोगों के लिए अच्छा होता है क्योंकि यह दो लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है। ऑक्सीटोसिन का सीधा संबंध बच्चे के जन्म और ब्रेस्ट फीडिंग से है।
हाल के एक सर्वे में पता चला है कि ऑक्सीटोसिन से मां अपने बच्चे से भावनात्मक रूप से जुड़ती है और सुरक्षित महसूस करती है। डॉ वेलफिश के अनुसार यह जरूरी नहीं है कि हर समय चिपका जाए लेकिन आपमें और आपके पार्टनर के बीच एक कम्फर्ट जोने का होना जरूरी है।
आपसी समझदारी बढ़ती है
शिकागो के मैरिज और फैमिली थेरपिस्ट जीवन में घनिष्टता पर जोर देते हुए कहते हैं कि मैरिटल थेरेपी में अधिकतर कपल्स संवाद नहीं होने की शिकायत करते हैं। लोग एक-दूसरे को जानना चाहते हैं और बातचीत और संवाद के जरिए ही लोग एक दूसरे को जान सकते हैं। चिपकना या लिपटना इस बात का संकेत देता है कि दोनों एक दूसरे को कितना जानते हैं।