संतूर वादक राहुल शर्मा ने शिव कुमार शर्मा संग अपना अनुभव साझा किया
- फोटो : सोशल मीडिया
जीवन की हर खूबसूरत याद के लिए पापा का शुक्रिया!
जब मैं छोटा था, तो किसी भी बच्चे की तरह मेरे पिता मेरे रोल मॉडल थे, लेकिन मां बताती है कि पिताजी कुछ अलग ही सोचते थे। वह कहते थे, “यह जरूरी नहीं है कि हमेशा बड़े संगीतकार का बेटा बड़ा संगीतकार बनेगा। यह कई जन्मों का संयम होता है। रियाज से उसमें समझ पैदा होती है, लेकिन अगर उसमें संस्कार नहीं हैं, तो वह चाहे किसी भी महान कलाकार का लड़का क्यों न हो, वह संगीतकार नहीं बन पाता।” इसी सोच की वजह से उन्होंने मुझे बचपन से संगीत नहीं सिखाया। वह पहले यह देखना चाहते थे कि मेरी रुचि संगीत में है या नहीं। मेरे बड़े भाई रोहित ने संगीत नहीं सीखा। लेकिन जब मैं 10-11 साल का था तो पिताजी को लगने लगा कि मैं संगीत सीख सकता हूं। एक दिन मां को उन्होंने कहा, “अगर अब हम राहुल को नहीं सिखाएंगे, तो यह उसके साथ अन्याय होगा।” पढ़ने के साथ-साथ मेरी तालीम शुरू हुई। शुरुआत में मेरी दिलचस्पी कंपोजिंग में ज्यादा थी, लेकिन धीरे-धीरे मुझे संतूर वादन पसंद आने लगा। पापा ने ही फिल्मी म्यूजिक में संतूर वादन की शुरुआत की और मुंबई में बड़े-बड़े संगीत निर्देशकों के साथ काम किया।
एक सोलो क्लासिकल वाद्ययंत्र को इस स्तर पर पहुंचाने का श्रेय उन्हें ही जाता है। वह एक अलग दर्शक वर्ग में संतूर को लेकर गए। पापा से ही सीखकर मैंने भी अपनी तरफ से कुछ कोशिशें शुरू की। ऐसे बहुत से मौके आए हैं, जब हमने एक साथ प्रस्तुति दी। कंसर्ट के लिए हमने दुनिया भर में यात्राएं की। साल 2011 में म्यूजिशियन केन्नीजी के साथ मेरी जुगलबंदी से उन्हें बहुत खुशी हुई थी।
एक पिता या गुरु के रूप में उन्होंने कभी मुझे अपनी फोटोकॉपी नहीं बनाना चाहा। जहां तक सवाल संगीत का है, उन्होंने ही मुझे सिखाया है। ठीक उसी समय उन्होंने बतौर कलाकार मुझे अपने आप आगे बढ़ने दिया। मेरे पिता ने संतूर को क्लासिकल वाद्य यंत्र का दर्जा दिलाने के लिए जिंदगी भर संघर्ष किया। यह कश्मीरी फोक इंस्ट्रूमेंट था, उन्होंने कुछ इनोवेशन करके इसे फाइन-ट्यूनिंग इंस्टमेंट में विकसित किया। साठ साल पहले किसी ने संतूर नहीं सुना था। आज यह वाद्ययंत्र दुनिया भर में संगीत की दुनिया का अभिन्न अंग है, लेकिन प्रेजेंटेशन के मामले में उन्होंने कभी संतूर के संगीत से समझौता नहीं किया। सिर्फ संगीत की शिक्षा के लिए ही नहीं, जीवन की हर खूबसूरत याद के लिए मैं उन्हें शुक्रिया कहना चाहूंगा।
(संतूर वादक राहुल शर्मा से अमर उजाला के लिए यह बातचीत कुछ दिन पहले हुई थी।)