पीरियड्स, महिलाओं में होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है, यह उतनी ही सामान्य है जितनी शरीर की अन्य शारीरिक क्रियाएं । लेकिन हमारे समाज में इस सामान्य प्रक्रिया को लेकर ढेरों कुरीतियों का चलन है । पीरियड्स के दौरान ढेरों प्रतिबंध व कुरीतियों की वजह से अक्सर ही महिलाओं को कई खतरों का सामना करना पड़ता है । ये खतरे कभी कभी जानलेवा भी सिद्ध होते हैं । इन मिथकों व लापरवाहियों से होने वाली बीमारियों की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश में महिलाओं की जनन संबंधित बीमारियों में से 70% बीमारियों का कारण पीरियड्स के दौरान की गई लापरवाही ही है ।
एक और आंकड़े के अनुसार भारत में सिर्फ 12% महिलाएं ही पीरियड्स के दौरान सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं । जबकि ये बात सर्वविदित है कि पर्सनल हाइजीन का ध्यान न रखने पर महिलाओं को कैंसर जैसी घातक बीमारियां भी हो सकती हैं । पीरियड्स एक समस्या नहीं है, लेकिन इस दौरान महिलाओं को अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है । पीरियड्स के दौरान इन खास बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए ।
पीरियड्स के दौरान पर्सनल हाइजीन से कतई समझौता न करें । साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें ।
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आज भी सैनिटरी पैड्स की जगह गंदे कपड़े, न्यूजपेपर, रेत, राख आदि का इस्तेमाल करती हैं जिससे इंफेक्शन होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है । इन सारी चीजों का भूलकर भी इस्तेमाल न करें ।
अच्छी गुणवत्ता वाले सैनिटरी पैड्स का ही इस्तेमाल करें । सैनिटरी पैड्स खरीदते समय उसकी गुणवत्ता के मानकों का जरूर निरीक्षण करें ।
पीरियड्स के दौरान हर 3-4 घंटे पर सैनिटरी पैड्स को बदल लें । अक्सर ऐसा देखा गया है कि महिलाएं पूरा दिन एक ही सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करती हैं । ऐसा करने से भी इंफेक्शन के खतरे बढ़ जाते हैं । इसलिए जरूरी है कि सही समय पर सैनिटरी पैड्स को बदल लिया करें ।
सैनिटरी पैड्स को इधर उधर कहीं भी न फेंके । इसे डिस्पोजेबल बैग में डालकर तब ही डस्टबिन में डालें ।