लकड़ी से बना एक शानदार कॉटेज
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ब्रिटेन के हर्टफोर्डशायर में आर्किटेक्ट टेट हार्मर ने लकड़ी के कॉटेज जैसे घर बनाए हैं। इसके बारे में उनका दावा है कि इनकी जड़ें इस क्षेत्र के कृषि इतिहास में हैं। हार्मर की कंपनी ने बंगले की जगह कम ऊर्जा खपत वाला एक पारिवारिक घर तैयार किया है। इसकी प्रेरणा पास के खेतों में बनी इमारतों और फूस की झोपड़ियों से ली गई।
इसमें कम ऊंचाई के छज्जे हैं। छत में खिड़कियां हैं और छत के कोने में आगे की ओर निकला छोटा सा चबूतरा है। छत बनाने के लिए पारंपरिक टाइलों की जगह उन्होंने पूरी इमारत को लकड़ी के आवरण में लपेट दिया है। लकड़ी के ऊपर रबर की एक झिल्ली चढ़ाकर उसे पानी से सुरक्षित बना दिया गया है। हार्मर कहते हैं, 'निर्माण सामग्रियों की टेक्नोलॉजी बदल गई है। यह छत वैसे ही काम करेगी जैसे टाइलें करती हैं।'
देहात में डिजाइन की संभावनाएं
ऐसा लगता है कि इलाका जितना ग्रामीण हो संभावनाएं उतनी ही ज्यादा होती हैं। न्यूवो लियोन के मैक्सिकन क्षेत्र में पहाड़ों के बीच बनाया गया नरिगुआ हाउस मुख्य ढांचे से तीन ओर निकला हुआ है। स्थानीय कंपनी पी प्लस ओ के वास्तुकार डेविड पेड्रोजा कैस्टेनेडा इसे देवदार के पुराने पेड़ों के बीच वाली जमीन पर पत्थर का काम बताते हैं। 'यह अविश्वसनीय परिदृश्य है जहां घर के अंदर से अविश्वसनीय दृश्य दिखते हैं।'
कैस्टेनेडा का कहना है कि दूरदराज के इलाकों में कभी-कभी बहुत कम नियम-कायदे होते हैं, जिससे वास्तुकारों को बहुत आजादी मिलती है। लेकिन वहां टेक्नोलॉजी नहीं होती और निर्माण सामग्रियां मिलने में दिक्कत होती है। अमेरिकी आर्किटेक्ट ओल्सन कुंडिंग ने इन सीमाओं का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए किया। कुंडिंग ने सैंटा टेरेसा का कोस्टा रिका क्षेत्र में ट्री हाउस बनाया है।
प्रशांत महासागर के तटीय इलाके में अर्ध-उष्णकटिबंधीय वन में स्थानीय इमारती लकड़ियों के इस्तेमाल से उन्होंने तीन मंजिला आयताकार घर बनाया है। ऊपर से नीचे तक पूरी इमारत, इसकी हर मंजिल खुली हुई है ताकि सूरज की रोशनी और हवा-पानी आसानी से आ सके। टॉम कुंडिंग का कहना है कि इस क्षेत्र में छुट्टी बिताने के लिए दो शैलियों के घर बन रहे हैं।
वो कहते हैं, 'जो लोग पश्चिमी वास्तुशिल्प से प्रभावित हैं, वे अपने लिए वातानुकूलित और पूरी तरह से बंद घर पसंद करते हैं ताकि बारिश और गर्मी का असर न हो। इसके उलट ट्री हाउस की तरह कुछ दुर्लभ घर हैं जो पर्यावरण और जलवायु को पूरी तरह अपनाते हैं।'
पोलैंड में आर्किटेक्ट फर्म केडब्लूके प्रोम्स के रॉबर्ट कोनिएज्नी ने विस्टुला नदी के किनारे बाय द वे हाउस बनाया है। वो कहते हैं, 'निश्चित रूप से इस घर का विचार एक बड़े क्षेत्र के लिए उपयुक्त है जो आम तौर पर शहरों में नहीं मिलता।' इस घर की डिजाइन कंक्रीट की एक पट्टी से बनी सड़क के इर्द-गिर्द तैयार की गई है जो ऊपर की ओर बढ़ते हुए इमारत की छत और दीवारों में तब्दील हो जाती है और आखिर में नदी के किनारे तक जाने वाले फुटब्रिज में बदल जाती है।
बड़ी जमीन होने का मतलब है कि वास्तुकार अपने ले-आउट के साथ खेल सकते हैं जो शहरों की तंग जगह में मुमकिन नहीं होता। ऑस्ट्रेलिया के नीले पहाड़ की ढलान पर कटुम्बा में पैट्रिक कीन का यही तजुर्बा है। उन्होंने वहां की पहाड़ी पर स्टील फ्रेम वाले मॉड्यूलर घर बनाए हैं।
कीन कहते हैं, 'सूरज की किरणों के कोण जैसे चीजें प्राथमिकता देने वाली हैं, फिर भी ले-आउट में कई तरह की आजादी है। ग्रामीण परिप्रेक्ष्य में, नए विचारों को परखा जा सकता है या जिन विचारों पर काम नहीं किया जा सका, उनको भी आजमाया जा सकता है। जगह होने पर इमारतों में असामान्य अनुपात को अपनाया जा सकता है। स्थानीय संस्कृति और क्षेत्रीय थीम को भी शामिल किया जा सकता है।' कीन अब थाईलैंड के समुद्र तट पर बीच हाउस बना रहे हैं जो असामान्य रूप से घुमावदार होगा।
अपवाद हैं ये घर
लंदन के वास्तुकार सैम सेलेंकी इन साहसिक परियोजोनाओं को अपवाद कहते हैं। कम से कम ब्रिटेन में आम घर ऐसे नहीं बनते। इन विशेष घरों को बनाने के लिए ग्राहक ऐसे वास्तुकार को काम पर लगाते हैं जो जगह के हिसाब से परियोजना की डिजाइन तैयार कर सके।
सेलेंकी ने ऑक्सफोर्डशायर में टेम्स नदी के किनारे रिवर हाउस बनाए हैं जो इस पर खरा उतरता है। वो मानते हैं कि ग्रामीण घरों के लिए नई डिजाइन वाले नजरिये को अपनाने से रोमांचक परियोजनाएं बन रही हैं। लुडविग के लिए, यह नजरिया वास्तुकार की नई सोच से बनता है। वो कहते हैं 'स्थानीय नहीं होने पर हम उन चीजों को पकड़ सकते हैं जो स्थानीय लोगों को आम लगती हैं और वे उस पर ध्यान नहीं देते। हम कुछ वैसा बनाने की कोशिश करते हैं जो बीच का हो। जो एकदम से अलग भी न हो और हूबहू स्थानीय भी न हो।'
लेकिन इंग्लैंड के देहात में बड़े पैमाने पर बनने वाले घरों की कहानी अलग है। सेलेंकी के मुताबिक, वे घर अब भी बिल्डर के मानक नक्शे पर बन रहे हैं और उनमें रहने वालों को कुछ भी विशेष या असामान्य अनुभव नहीं होता। शायद यही वह जगह है जहां वास्तुकारों को ध्यान देना चाहिए। लेखक टॉम फोर्ट ऐसा ही सोचते हैं।
अपनी किताब 'द विलेज न्यूज़- द ट्रूथ बिहाइंड इंग्लैंड्स रूरल आइडिल' में वो पाठकों से उस स्थिति की कल्पना करने को कहते हैं जब फोर्ट को देहाती जिंदगी की देखरेख का प्रभार दिया गया है। वो लिखते हैं, 'गांव को बचाने के प्रभारी के रूप में मैं इमारतों की एकरूपता को ख़त्म कर दूंगा, क्योंकि वो मकान ऊबाऊ और नीरस हैं।' वो ऐसे डिजाइनर और वास्तुकार नियुक्त करना चाहते हैं जो साहसी सोच वाला हो। क्या नए ग्रामीण वास्तुशिल्प आंदोलन में किसी दिन इस तरह की चीज होगी?