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Lal Bahadur Shastri Death Anniversary: आखिर कैसे हुई शास्त्री जी की मौत, जानिए ताशकंद में क्या हुआ था उस रात

Thu, 11 Jan 2024 11:34 AM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

उजबेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में 11 जनवरी को  लाल बहादुर शास्त्री का निधन हुआ था। कहा जाता था कि हार्ट अटैक की वजह से उनका निधन हुआ था, तो वहीं यह भी कहा जाता है कि उनको जहर दिया गया था। 
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lal bahadur shastri death mystery - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Lal Bahadur Shastri Death Anniversary: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री साफ-सुथरी छवि के नेता थे। उनका व्यक्तित्व से सादगी से भरा हुआ था। इसके साथ ही मीठी भाषा के व्यक्ति थे। पंडित जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद लगभग डेढ़ साल तक शास्त्री जी देश के प्रधानमंत्री थे। उन्होंने अपनी काबलियत को पूरी दुनिया के सामने साबित किया था। देश का  दुर्भाग्य था कि प्रधानमंत्री रहते ही उनकी रहस्यमयी मौत हो गई थी। उजबेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में 11 जनवरी को उनका निधन  हुआ था। कहा जाता था कि हार्ट अटैक की वजह से उनका निधन हुआ था, तो वहीं यह भी कहा जाता है कि उनको जहर दिया गया था। हालांकि उनकी मौत कैसे हुई थी, वो अभी भी रहस्य है। आज हम उनकी पुण्यतिथि पर जानते हैं कि उनके निधन के दिन क्या-क्या घटनाएं घटी थीं? 

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शास्त्री जी के कार्यकाल में भारत ने जीती 1965 की जंग 

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने 9 जून 1964 को देश की कमान संभाली थी। वह करीब 18 महीने ही भारत के प्रधानमंत्री रहे। भारत ने लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री रहने के दौरान ही पाकिस्तान से 1965 की जंग जीती थी। इस दौरान अयूब खान पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे। पंडित नेहरू के निधन के बाद पाकिस्तान ने शास्त्री जी के साथ साल 1964 में एक बैठक की थी। इसके बैठक के बाद शास्त्री जी और अयूब खान की मुलाकात हुई थी, जिसमें शास्त्री की सादगी को देखकर अयूब खान को लगा कि वह भारत से कश्मीर जबरन हथिया सकते हैं। 

अयूब खान ने यहीं पर गलती कर दी और कश्मीर पर कब्जा करने के लिए अगस्त 1965 में घुसपैठियों को भेज दिया। शास्त्री के सादगी से अयूब खान धोखा खा गए और पाकिस्तान को यह जंग भारी पड़ गई। पाकिस्तान सेना ने चंबा सेक्टर हमला बोला, तो प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने भारतीय सेना को पंजाब से मोर्चा खोलने का आदेश दे दिया। नतीजा यह हुआ है कि भारतीय सेना लाहौर कूच कर गई। सितंबर 1965 में भारत ने लौहार पर लगभग कब्जा कर लिया। अपने इस शहर को पाकिस्तान खोने की कंगार पहुंच गया था, लेकिन यूनाइटेड नेशंस ने  23 सितंबर 1965 को हस्थक्षेप किया। इसके बाद भारत ने युद्धविराम की घोषणा की। 
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क्या है ताशकंद का राज? 

भारत और पाकिस्तान में जंग रुकने के बाद ताशकंद की कहानी की शुरुआत होती है। 1965 की इस जंग के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत के लिए ताशकंद को चुना गया। सोवियत संघ के तत्कालीन प्रधानमंत्री एलेक्सेई कोजिगिन ने समझौते की पेशकश की थी। 10 जनवरी 1966 का ताशकंद में समझौते के लिए दिन तय किया गया था। इसके समझौते के तहत दोनों देशों को अपनी-अपनी सेना को  25 फरवरी 1966 तक सीमा से पीछे हटानी थी। समझौते पर हस्ताक्षर के बाद प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की11 जनवरी की रात में रहस्यमयी परिस्थितियों में निधन हो गया। 

मौत से जुड़े रहस्य

बताया जाता है कि ताशकंद में हुए समझौते के बाद शास्त्री जी दवाब में थे। जानकार बताते हैं कि पाकिस्तान को हाजी पीर और ठिथवाल वापस देने के कारण शास्त्री की भारत में आलोचना की जा रही थी।  वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर उस समय शास्त्री के मीडिया सलाहकार थे। उन्होंने ही परिवार को शास्त्री के निधन की खबर दी थी।

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नैयर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि हाजी पीर और ठिथवाल को पाकिस्तान को वापस देने से शास्त्री की पत्नी भी बेहद नाराज थीं। यहां तक कि उन्होंने शास्त्री से फोन पर बात करने से भी इंकार कर दिया था, जिससे शास्त्री को बहुत चोट पहुंची थी। अगले दिन शास्त्री के निधन के बाद देश के साथ वह भी हैरान थीं। दावा किया जाता है कि शास्त्री जी को जहर देकर मारा गया था, तो कुछ लोग कहते हैं कि दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ था।

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