फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कबीर दास जयंती 2020: कबीर अमृतवाणी देती है हमें जीवन की शिक्षा 

Fri, 05 Jun 2020 09:52 AM IST
योगेश जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
कबीर दास
5 जून, शुक्रवार को कबीर जयंती है। हर साल ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा के दिन कबीर जयंती मनाई जाती है। इस बार यह तिथि 5 जून को पड़ रही है। कबीर मध्यकाल के बहुत प्रख्यात कवी और समाज सुधारक थे। कबीर दास जी की अमृतवाणी से आज भी जीवन जीने की शिक्षा मिलती है। जो व्यक्ति कबीर दास जी के बताए हुए मार्ग में चलता है उसे परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है। आइए जानते हैं कबीर दास जी ने अमृतवाणी में किन बातों का वर्णन किया है....

 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 6
गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पांय
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय।

अर्थ: 
  • संत कबीरदास जी कहते हैं कि गुरु और गोविंद जब एक साथ खड़े हों तो उन दोनों में से आपको सबसे पहले किसे प्रणाम करना चाहिए। कबीरदास जी के अनुसार सबसे पहले हमें अपने गुरु को प्रणाम करना चाहिए, क्योंकि उन्होंने ही गोविंद के पास जानें का मार्ग बताया है। 

 
विज्ञापन

3 of 6
s - फोटो : social media
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

अर्थ
  • संत कबीर कहते हैं कि बड़ी—बड़ी पोथी पढ़ने का कोई लाभ नहीं है, जब तक कि आपमें विनम्रता नहीं आती है और आप लोगों से प्रेम से बात नहीं करते हैं। कबीर कहते हैं जिसे प्रेम के ढाई अक्षर का ज्ञान प्राप्त हो गया वहीं इस संसार का असली विद्वान है। 
 

4 of 6
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।

अर्थ
  • कर्मकांड के बारे में कबीरदास जी का कहना है कि लंबे समय तक हाथ में मोती का माला फेरने से कुछ लाभ नहीं होने वाला है। इससे आपके मन के भाव शांत नहीं होंगे। चित्त को शांत रखने और मन को काबू रखने पर ही मन की शीतलता प्राप्त होगी। कबीर दास जी लोगों को अपने मन को मोती के माला के समान सुंदर बनाने की बात करते हैं। 
 
विज्ञापन

5 of 6
जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

अर्थ
  • कबीरदास जी हमेशा जात—पात का विरोध किया। उनका कहना था कि आप किसी से ज्ञान प्राप्त कर रहे हों तो उसकी जाति के बारे में ध्यान न दें, क्योंकि उसका कोई महत्व नहीं होता है। बिल्कुल वैसे ही, जैसे तलवार का महत्व उसे ढकने वाले म्यान से ज्यादा होता है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होय
यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोय

अर्थ
  • कबीर मन की पवित्रता पर ज्यादा जोर देते हैं। वह कहते हैं कि यदि आपका मन साफ और शीतल है तो इस संसार में कोई भी मनुष्य आपका दुश्मन नहीं हो सकता है, लेकिन अगर आप अपने अहंकार को नहीं छोड़ेंगे, तो आपके बहुत से लोग दुश्मन बन जाएंगे। ऐसे में यदि आप समाज में खुश रहना चाहते हैं, तो किसी को भी अपना दुश्मन न बनाएं। सभी से प्रेमपूर्वक व्यवहार कीजिए। सभी आपके दोस्त बनकर रहेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें