पेट या सीने में जलन, सिरदर्द से लेकर पेट में अल्सर जैसी समस्याओं की जड़ गैस्ट्रिक हो सकती है। अगर आप इस समस्या से अक्सर परेशान रहते हैं तो डाइट में परहेज आपके लिए बहुत मददगार हो सकते हैं।
मायो क्लीनिक के अध्ययन के अनुसार गैस्ट्रिक का सबसे आसान और प्रभावी समाधान है डाइट और जीवनशैली में बदलाव। आइए जानें, डाइट में ऐसे पांच परहेजों के बारे में जो गैस्ट्रिक से बचाव करने में आपके लिए मददगार हो सकते हैं।
1. फैट्स भरी डाइट
बहुत तला-भुना या हेवी डाइट में ट्रांस फैट्स की मात्रा अधिक होती है जो शरीर में गैस्ट्रिक की समस्या की वजह हो सकती है। खासतौर से रात में खाने के दौरान अधिक हेवी डाइट गैस्ट्रिक के रोगियों के लिए घाटे का सौदा है।
चिकन, मीट, फ्राइड अंडे, आलू, प्याज आदि का सेवन अधिक करने से ट्रांस फैट्स बढ़ता है जिससे रक्त के संचार में अवरोध होता है और गैस्ट्रिक का दर्द बढ़ता है।
2. रिफाइंड डाइट
हर वह चीज जो रिफाइंड करके तैयार की जाती है वह गैस्ट्रिक के मरीजों के लिए ठीक नहीं है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के शोध के अनुसार, मैदा और पास्ता जैसी चीजें, जो रिफाइंड करके तैयार की जाती हैं, ट्रांस फैट्स और शर्करा से भरपूर होती हैं। इनकी अधिकता गैस्ट्रिक की समस्या बढ़ा सकती है।
3. मसालेदार चटपटा भोजन
हो सकता है कि चाट, पकौड़े, लाल मिर्च की अधिकता वाली डाइट आपको खाने में बहुत स्वादिष्ट लगती हो लेकिन इनसे निकलने वाले रसायन शरीर में गैस बनाते हैं जिससे गैस्ट्रिक के मरीजों को पेट में जलन, दर्द और अल्सर की शिकायतें अधिक होती हैं।
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4. कच्ची सब्जियां
अगर आप सब्जियों को सलाद के रूप में खाने पर हमेशा जोर देते हैं तो हो सकता है कि गैस्ट्रिक की आपकी समस्या का कारण यही हो। प्याज, टमाटर जैसी सब्जियों को सलाद के रूप में अधिक खाने से गैस्ट्रिक के मरीजों को दिक्कत हो सकती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक सब्जियों को बिना पकाए खाने से या बिना पूरी तरह चबाए खाने से पेट में जलन की समस्या अधिक की आशंका बढ़ जाती है।
5. अल्कोहल और कॉफी
गैस्ट्रिक के मरीजों के लिए अत्याधिक अल्कोहल या अत्याधिक कॉफी का सेवन भी मुसीबतों को निमंत्रण देने जैसा ही है। इनमें मौजूद रसायन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बहुत अधिक प्रभावित करते हैं।