बाजार में 'हेल्दी', 'डाइट' और 'लो फैट' के नाम से बिकने वाली हर डाइट जरूरी नहीं कि जितनी सेहतमंद बताई जाती हो, असलियत में भी उतनी ही फायदेमंद हो। अगर आप भी बाजार से इन चीजों को सेहतमंद मानकर लाते हैं और इनका सेवन घर के बने खाने के विकल्प के तौर पर करते हैं तो इनकी असलियत जानना जरूरी है।
रेडीमेड फ्रूट जूस
बाजार में बिकने वाले रेडीमेड फलों के जूस हो सकता है कि सोडा या कोल्ड ड्रिंक की तुलना में बेहतर हो सकते हैं लेकिन ये जितने फायदेमंद कहे जाते हैं, वाकई उतने फायदेमंद नहीं हैं। इनमें मौजूद कैलोरी, आर्टिफिशियल शुगर और प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा इन्हें सेहतमंद नहीं बनाते।
विकल्पः बेहतर होगा इनकी जगह आप घर पर ही फलों और सब्जियों के जूस बनाकर पिएं।
मिनटों में बनने वाले पॉपकॉर्न
आजकल बाजार में तीन मिनट में कुकर या माइक्रोवेव में तैयार होने वाले पॉपकॉर्न खूब बिकते हैं। स्वाद में भले ही ये आपको भाएं लेकिन सेहत के हिसाब से ये फायदेमंद नहीं। इनमें चीज़, फैट्स, ट्रांस फैट्स का इस्तेमाल किया जाता है जिससे इनकी लज्जत बढ़ सके।
विकल्पः पॉपकॉर्न के लिए आप खुद ही मक्के के दाने माइक्रोवेव में डालकर पॉपकॉर्न बना सकते हैं या फिर कम से कम बिना फ्लेवर या बिना मक्खन वाले पॉपकॉर्न खाएं।
मल्टीग्रेन या व्हीट ब्रेड
मैदे वाली व्हाइट ब्रेड के विकल्प के रूप में आप अगर मल्टीग्रेन या व्हीट ब्रेड यह सोचकर खाते हैं कि यह आपके लिए बहुत फायदेमंद है तो आप गलत हैं।
इनमें भी आटे को पूरी तरह से रिफाइन किया जाता है जिससे पौष्टिकता कम होती है। साथ ही इनमें सोडियम की मात्रा भी अधिक होती है।
विकल्पः विकल्प के तौर पर घर की बनी रोटी से बेहतर कुछ भी नहीं।
आइस टी
आइस टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स इसे हेल्दी ड्रिंक के रूप में कोला और सोडा से कहीं बेहतर साबित करते हैं लेकिन इनमें मौजूद आर्टिफिशियल शुगर इनके फायदों का मजा किरकिरा कर देती है।
एक छोटे पैकेट आइस टी में करीब 60 ग्राम शुगर होती है जिससे आप 200 कैलोरी बढ़ा लेंगे।
लो फैट मिल्क
दूध की मलाई को आप सेहत के लिए अच्छा नहीं मानते हैं लेकिन आप यह नहीं जानते कि लो फैट दूध का मतलब यह कतई नहीं है कि उसमें बैड फैट न हो। इसके अलावा, दूध को रिफाइन करने की प्रक्रिया में कई पौष्टिक तत्व खत्म हो जाती है।
विकल्पः सामान्य दूध से मलाई हटाकर भी पी सकते हैं। यह एक कंप्लीट फूड है इसलिए इसके फायदों को ध्यान में रखकर इसे जरूर लें।
फैट फ्री डाइट
बाजार में कई सारे उत्पाद फैट फ्री के लेबल से बिकते हैं। लेकिन अगर किसी उत्पाद में फैट कम है तो उसका इसका मतलब यह नहीं कि वह सेहतमंद हो। उसमें कैलोरी और सोडियम की मात्रा कितनी है, यह भी मायने रखता है।
कई शोधों में भी यह साबित हो चुका है कि फैट फ्री डाइट जंकफूड खाने की इच्छा और बढ़ाती है।
विकल्पः बाजार में बिनके वाली फैट फ्री डाइट को वैकल्पिक तौर पर लेने में बुराई नहीं लेकिन इनपर निर्भर न हों। फल, सब्जियां और घर के बने भोजन से बेहतर भला क्या विकल्प हो सकता है।