लैपटॉप पर देर तक लगे रहने या टीवी पर घंटों प्रोग्राम, वजह कुछ भी हो लेकिन देर से सोने और कम नींद लेने का खामियाजा किशोरों के लिए काफी बड़ा है।
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हाल में हुए एक अमेरिकी शोध में माना गया है कि कम नींद लेने वाले किशोरों को गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं, जुकाम और फ्लू का रिस्क अधिक होता है।
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अमेरिका के ब्रेडले हॉस्पिटल स्लीप रिसर्च लैबोरेट्री के शोधकर्ता कैथरीन ऑर्जेक का मानना है कि पूरी नींद न हो पाने की वजह से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं, जुकाम और फ्लू जैसी दिक्कतें किशोरों के बीच बेहद आम है।
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में हाई स्कूल के छात्रों ने पाया कि वे इन समस्याओं की वजह से अधिक छुट्टियां लेते हैं और इसका संबंध उनके सोने के तरीके से भी है।
ऑर्जेक के अनुसार, ''लंबे समय तक कम सोने से किशोरों में न सिर्फ नींद से जुड़ी समस्याएं होती हैं बल्कि कम सोने वाले किशोर अधिकतर मोटापे के शिकार होते हैं।''
शोधकर्ताओं का मानना है कि जुकाम, फ्लू या पाचन संबंधित समस्याओं से परेशान किशोर अगर नींद थोड़ी अधिक लें तो इनसे उबरने में उनको अधिक आसानी होती है।
यह शोध स्लीप जर्नल में प्रकाशित हुआ है।