जॉनी हॉट डॉग डिश की शुरुआत 40 साल पहले हुई थी।
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40 साल पहले हुई थी शुरुआत, देसी घी और मक्खन से बनाता है हॉट डॉग
जॉनी हॉट डॉग डिश की शुरुआत 40 साल पहले हुई थी। स्टारलिट टॉकीज इस डिश की शुरुआत का गवाह बना। 1980 के दशक में विजय सिंह दुकान को इंदौर के 56 दुकान पर ले आए जो कि खानपान के लिए मशहूर है। लेकिन इस डिश का जायका ऐसे ही बरकरार रहा। देशी घी और मक्खन में बनाई जाने वाली इस डिश का स्वाद लोगों के जुंबां पर ऐसा चढ़ा कि दीवानगी ही छा गई। इंदौर के आम आदमी से लेकर नामी-गिरामी और कई हस्तियां विजय राठौड़ के इस लजीज डिश को चख चुकी हैं। नाम से यह डिश जरूर अमेरिकी है लेकिन इसका स्वाद पूरी तरह से भारतीय ही है।
जॉनी हॉट डॉग को बन ब्रेड को रोल करके बनाया जाता है। विजय राठौड़ ने इस अवॉर्ड को जीतने के बाद खुशी जताते हुए अपने एक इंटरव्यू में कहा कि मेरे बचपन में यहां एक सिनेमाघर था जिसमें सिर्फ अंग्रेजी फिल्में ही लगती थीं। इन फिल्मों में इस तरह के हॉट डॉग को बेचा जाता था।
फिल्म देखने हर रात सिनेमाघर में बहुत से लोग जाते और इन्हीं फिल्मों से थोड़ी बहुत अंग्रेजी बोलना सीख जाते। यहां काफी चहल-पहल रहती और फिल्म देखने के बाद लोग कुछ खाते-पीते थे। 70 के दशक में यह थिएटर बंद हो गया। 70 के दशक के आखिरी में उन्होंने यहां हॉट डॉग बेचना शुरू किया। राठौड़ के पिता किसान थे।
मां की सहायता से तैयार की हॉट डॉग रेसिपी
मां की सहायता से तैयार की हॉट डॉग रेसिपी
राठौड़ ने जॉनी हॉट डॉग बेचने से पहले कई जगह नौकरी की और स्थानीय चाय दुकानों पर भी काम किया। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा- एक बार मैंने पांच सौ रुपए बचाए और अपने पिता से कहा कि मुझे अब नौकरी नहीं बल्कि अपना खुद का काम करना है। उनका कहना है कि जब मेरी मां घर में खाना बनाती थी तो मैं उसे देखा करता था। मुझे लगता था मैं भी यह कर सकता हूं। मुझे लगने लगा था कि किसानी तो मेरे बस की नहीं है लेकिन मैं यह काम कर सकता हूं।
विजय कहते हैं- उस वक्त खेती करने में बड़ी दिक्कत होती थी क्योंकि न ही बिजली थी और न ही मोटर, किसानी के लिए मानसून के भरोसे रहना पड़ता था। इसी दौरान उन्होंने अपने मां की सहायता से हॉट डॉग की रेसिपी तैयार की।
विजय कहते हैं कि उस वक्त हम घर में ज्वार और बाजरा ही खाते थे और हमें पता नहीं था कि हॉट डॉग जैसी चीज कैसे खाई जाती है। गेहूं की रोटी मिलना उन दिनों लोगों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था लेकिन धीरे-धीरे लोगों को हॉट डॉग पसंद आने लगा और इसकी लोकप्रियता बढ़ने लगी।
देश में आपातकाल का वक्त था और इसके कुछ सालों बाद सन् 1978-1979 में विजय राठौड़ ने हॉट डॉग की दुकान खोली। वह कहते हैं कि उस वक्त आसपास की दुकानों के नाम या तो विजय चाट हाउस या फिर जैन स्वीट ही हुआ करते थे, लेकिन हमने अपनी दुकान का नाम हॉट डॉग रखा।
विजय राठौड़ कहते हैं कि इस डिश की शुरुआती शाकाहारी डिश के तौर पर हुई थी लेकिन अब मेन्यू में मटन हॉट डॉग भी जुड़ गया है।