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ध्यान दें तो ठीक हो सकती है सेरेब्रल पालसी

Wed, 03 Oct 2012 11:10 AM IST
इलाहाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
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अगर जन्म लेते ही बच्चा रोया नहीं या समय के साथ उसके शरीर में हरकत नहीं हो रही है तो तनिक भी न सोचिए। यह सेरेब्रल पालसी हो सकती है। शुरुआत में ही विशेषज्ञ चिकित्सक से इसका इलाज कराने पर यह ठीक हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेरेब्रल पालसी की पहचान जरूरी है। आमतौर पर लोग बच्चों की असामान्य हरकतों पर ध्यान नहीं देते और सात-आठ साल होने पर जब ध्यान देते हैं तब तक देर हो चुकी होती है।
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यह बीमारी मांसपेशियों में ढीलेपन और दिमाग का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के कारण होती है। इलाज भी इसे ही ध्यान में रखकर किया जाता है। कसरत और उपकरणों के माध्यम से मांसपेशियों में ताकत भरी जाती है, साथ ही दिमाग के कमजोर हिस्से धीरे-धीरे ठीक किए जाते हैं। तीन से चार महीने के उपचार में मरीज चलने की स्थिति में आ जाता है।

बीमारी का रूप पहचानकर करते हैं इलाज
सेरेब्रल पालसी भी कई तरह की होती है। संवेदना ट्रस्ट के डॉ. जितेंद्र कुमार जैन के मुताबिक किसी को देखने की समस्या होती है तो किसी का दिमाग सोच नहीं पाता। किसी को शरीर की हरकतों पर काबू नहीं रहता। बीमारी की प्रकृति पहचान कर उसका इलाज किया जाता है। मसलन मांसपेशियों पर काबू नहीं है तो दो से तीन महीने क्लीनिक में विशेषज्ञ उन्हें ट्रेनिंग देते हैं। ग्लास पकड़ना, बाल पकड़ना, बुलाने और बैठने के इशारे करना, खुद से कपड़े बदलना जैसी चीजें प्रैक्टिस से सिखाई जाती हैं, साथ ही मांसपेशियों की अकड़न कम करने को मशीनों का सहारा लिया जाता है।
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जागरूकता है जरूरी
डॉ. जैन के मुताबिक लोगों को सेरेब्रल पालसी (सीपी) के बारे में पता नहीं है, यह सबसे बड़ी परेशानी है। वे समझ ही नहीं पाते कि उनका बच्चा इस रोग की जद में है। कुछ साल पहले तक डॉक्टर और परिजन बच्चों में सेरेब्रल पालसी से उत्पन्न विकलांगता को पोलियो समझ लेते थे। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में 35 लाख से भी ज्यादा बच्चे इस बीमारी की चपेट में हैं। डॉ. जैन का दावा है कि मौजूदा समय में अकेले इलाहाबाद में ही 10 हजार से ज्यादा बच्चे सेरेब्रल पालसी के शिकार हैं। ऐसे बच्चों का विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराने पर 90 प्रतिशत तक सुधार की गुंजाइश होती है।

इलाज के हैं कई तरीके
डॉ. जैन के मुताबिक न्यूरो डेवलपमेंट, पोजिशनिंग, एडवांस फिजियोथेरेपी और सर्जरी के जरिए उपचार किया जा रहा है। इसके अलावा सेंसरी इंटीग्रेशन और इस्टीमुलेशन से भी बीमारी ठीक की जा सकती है। वरिष्ठ  फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. राकेश चंद्रा कहते हैं कि अब सेरेब्रल पालसी पीड़ित बच्चों के अभिभावक जागरूक हो रहे हैं। जल्दी इलाज शुरू हो जाने पर सीपी से पीड़ित बच्चों की जिंदगी बोझ बनकर नहीं रह जाती है। अपने बच्चों को इस बीमारी से बचाने के लिए सबसे बेहतर तरीका तो यही है कि डिलेवरी अनुभवी डॉक्टर से अच्छे प्रसूति केंद्र में ही कराई जाए।  
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रोग के लक्षण
-जन्म के वक्त बच्चे का नहीं रोना
-तीन माह में गर्दन न संभाल पाना
-आठ माह तक बैठना न शुरू हो
-डेढ़ साल में भी वो चल न पाए
-आखें तिरछी, प्रतिक्रिया ढीली

रोग के कारण
-डिलेवरी होते ही बच्चे का सांस न ले पाना
-देरी से सांस लेने में ब्रेन डैमेज हो जाता है
-जन्म के वक्त मुंह में गंदा पानी चला जाना
-प्री-मेच्योर डिलेवरी
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