फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केवल 30 मिनट में पता चल सकेगा इबोला है या नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
वैज्ञानिकों ने महज 30 मिनट में इबोला संक्रमण की पहचान कर लेने वाली एक सस्ती तकनीक तैयार की है, जो जल्द ही डॉक्टरों को उपलब्ध हो जाएगी।
विज्ञापन


वैज्ञानिकों के अनुसार डीएनए प्रोगामिंग वाले ब्लॉटिंग पेपर(सोख्ता काग़ज़) की मदद से इबोला की जांच की जा सकती है।

शोधकर्ताओं ने प्रमाणित किया है कि केवल 12 घंटो में प्रोटोटाइफ इबोला टेस्ट को विकसित किया जा सकता जिसे बनाने में लगभग 20 डॉलर की सामाग्री का प्रयोग होता है।

इस परीक्षण में एक जैविक घोल का प्रयोग किया जाता है जिसमें आरएनए (राइबोन्यूक्लिक एसिड) भी मिला होता है। आरएनए मनुष्य की आनुवंशिकी में प्रमुख भूमिका निभाता है।
विज्ञापन

Trending Videos

आसानी से संरक्षण

शोधकर्ताओं का कहना है कि इसे फ्रिज-ड्राई(किसी घोल को संरक्षित करने की ख़ास तकनीक) करके किसी साधारण काग़ज़ पर संरक्षित किया जा सकता है।

बोस्टन विश्वविद्यालय और हार्वर्ड विश्वविद्यालय दोनों से जुड़े शोधकर्ता जिम कॉलिन ने इस शोध का नेतृत्व किया।

कोलिन कहते हैं कि ये जैविक चूर्ण (पाउडर) साधारण पानी के प्रयोग से भी सक्रिय हो सकता है।

वो कहते हैं, "एक बार जब ये पाउडर दोबारा गीला होता है तो छोटे काग़ज़ के टुकड़े पर ये ऐसे काम करता है जैसे वो किसी जीवित कोशिका के अंदर हो।"
विज्ञापन

रंग बदलकर देता है पता

कॉलिन के अनुसार केवल 12 घंटों में उनकी टीम के दो लोगों ने इबोला की परीक्षण करने वाले 24 सेंसर बनाए।

यह जांच किट इबोला संक्रमण होने पर पीले रंग को बैंगनी रंग में बदल देती है और यह परिवर्तन महज आधे घंटे में नज़र आने लगता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार परंपरागत एंटीबॉडी टेस्ट में परिणाम आने में महीनों लग जाते हैं और इसमें हज़ारों पाउंड ख़र्च आता है।

कोलिंस ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा विकसित इबोला टेस्ट अभी उन जगहों पर प्रयोग होने लायक नहीं है जहाँ यह बीमारी बड़े स्तर पर फैली हुई है। वो उम्मीद जताते हैं कि ऐसी जगहों पर टेस्ट करने लायक तकनीक भी विकसित की जा सकती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें