ठेले पर मिक्स फ्रूट जूस हो या फिर बाजार का पैकेज्ड जूस, डाइट में कुछ 'हेल्दी' लेने की संतुष्टि की वजह से इन्हें हर उम्र के लोगों के लिए सेहतमंद माना ही जाता है। लेकिन क्या यह वाकई उतना ही सेहतमंद है जितना कि समझा जाता है? जवाब है नहीं।
अगर आप अपनी डाइट में फल या पौष्टिक आहार नहीं ले पा रहे हैं तो जूस से उसकी भरपाई पूरी तरह संभव नहीं है। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. गीतू अमरनानी से बातचीत के आधार पर जानिए फलों और सब्जियों के जूस से जुड़ी ऐसी कई धारणाओं के बारे में जो आपके लिए भ्रम से अधिक कुछ भी नहीं हैं।
भ्रम - फलों जितने सेहतमंद उनके जूस भी हैं।
हकीकत - यह सोच बिल्कुल गलत है। जूस कभी भी फल का विकल्प हो ही नहीं सकते। फलों में मौजूद फाइबर व कई पोषक तत्व उनका छिलका उतारने या काटने से निकल जाते हैं। जूस का महत्व उनके लिए अधिक है जो फल पचा नहीं पाते या फिर छोटे बच्चे। इसके अलावा, बाहर मिलने वाले जूस हाइजीन की दृष्टि से भी फायदेमंद नहीं होते हैं।
भ्रम - जूस कभी भी पिएं, फायदेमंद हैं।
हकीकत - जूस जब बनाएं, तुरंत पी लें। जूस बनाकर रखने से जब यह ऑक्सीजन के संपर्क में आता है तो ऑक्सीडाइज्ड हो जाता है, ऐसे में यह फायदा कम नुकसान अधिक करता है।
भ्रम- वजन घटाने में मददगार हैं जूस।
हकीकत- वजन घटाने में जूस से कहीं अधिक भूमिका फलों की होती है। फलों में फाइबर और पोषक तत्व होते हैं जिन्हें खाने से आपका पेट भी भरता है और आप स्नैक्स कम खाते हैं। जबकि जूस में शक्कर की मात्रा होती है जो वजन घटाने के बजाय बढ़ाती है। अगर आप वजन घटाना चाहते हैं तो जूस के बजाय अधिक फल खाएं।
भ्रम - सूप से बेहतर है सब्जियों का जूस।
हकीकत - अगर आप सोचते हैं कि सब्जियों को पकाने से उसके पोषक तत्व कम होते हैं इसलिए बेहतर है कि उनका जूस ही पी लें, तो सोच बदल लें। सब्जियों को पकाकर उनका पानी यानी सूप पीने से पोषक तत्व नष्ट नहीं होते बल्कि उन्हें पीसकर या छानकर पीने से होते हैं।
भ्रम - सभी के लिए फायदेमंद है जूस।
हकीकत - पालक और हरी सब्जियों के जूस किडनी और बीपी के मरीजों के लिए सेहतमंद नहीं हैं जबकि फलों के जूस डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद नहीं हैं क्योंकि उनमें प्राकृतिक रूप से शक्कर होती ही है।