व्यक्ति को स्वाद की दृष्टि से खाद्य पदार्थों के समग्र प्रभाव का अनुभव करने की क्षमता पैदा करनी चाहिए। प्रकृति हमें ऐसे फल और सब्जियां देती हैं, जो ऋतु के अनुसार, भोज्य पदार्थों में संतुलन लाती हैं। जैसे गर्मियों में बहुत से रसदार मीठे फल और कड़वी सब्जियां एवं सलाद की चीजें शरीर को ठंडक पहुंचाती हैं।
सर्दियों में खट्टे स्वादवाले फल होते हैं, जो हमें अग्नि तत्व प्रदान करते हैं। गर्म तासीरवाली चीजों के साथ ठंडी तासीरवाले और ठंडी तासीर की चीजों के साथ गर्म तासीरवाले मसाले प्रयोग किए जाएं। यह करते समय व्यक्ति की प्रकृति, समय, स्थान और विशेष स्थितियों का भी ध्यान रखना चाहिए।
ठंडी तासीरवाली वस्तुओं की, जिनसे वात् विकार बढ़ता है, उन्हें अदरक, लहसुन और मेथी के साथ सावधानी से बनाएं, जो गर्म तासीरवाले होते हैं। ठंडी तासीरवाली चीजों को अधिक मात्रा में नहीं खाना चाहिए। यदि विशेष हालत में खाना ही पड़े तो उसके साथ आधा चम्मच अजवाइन, नमक और नींबू का थोड़ा सा रस मिलाकर लेना चाहिए। इस मिश्रण को खाने के बाद गुनगुने पानी के साथ लेना चाहिए। इससे त्रिदोष ऊर्जा के विकार से बचा जा सकता है।