कितना अच्छा रहे कि कोई आपको एसएमएस करके याद दिला दे कि आपको दवा कितने बजे लेनी है या फिर आपकी एक कॉल पर डॉक्टर खुद घर आ जाए।
यह नया चलन मेट्रो के साथ-साथ छोटे शहरों में भी तेजी से पॉपुलर हो रहा है। यानी आप सिर्फ फोन या इंटरनेट की मदद से हेल्थ सर्विसेज सबस्क्राइब कर सकते हैं।
डोर-टू-डोर सुविधाएं
डोर-टू-डोर सर्विसेज़ में रजिस्ट्रेशन के बाद फोन कॉल या एसएमएस पर हेल्थ सर्विसेज उपलब्ध कराई जाती हैं। आपात स्थिति- जैसे दिल का दौरा पड़ने पर आपको डॉक्टर की तलाश में दौड़ना नहीं पड़ेगा बल्कि आस-पास का कोई डॉक्टर सीधे आपके घर भेजा जाएगा।
बच्चे के टीके से लेकर सभी तरह के टेस्ट के लिए घर पर ही हेल्थ केयर एक्जिक्यूटिव आएगा। न सिर्फ आप कॉल करके दवाएं घर पर मंगा सकते हैं बल्कि आपको यह भी बताया जाएगा कि दवाएं किस वक्त लेनी हैं।
इस सर्विस में बीमारियों से बचाव तथा हेल्थ से जुड़ी सारी महत्वपूर्ण जानकारियां आपको फोन पर मिलती रहेंगी। इतना ही नहीं, मेडिकल बीमा तक आप अपने घर पर ही करवाने में सक्षम होंगे।
छोटे शहरों पर फोकस
इस तरह की सर्विसेज दरअसल बड़े शहरों की बजाय छोटे शहरों ज्यादा पॉपुलर हो रही हैं। जहां सही जानकारी व अच्छी सुविधाओं का अभाव है।
कर्तव्य हेल्दिऑन- जो मोबाइल हेल्थ सर्विसेज मुहैया कराती है- के निदेशक अनिल नायक का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संरचना का अभाव है। ज्यादातर कंपनियां इसे समझती हैं और व्यवसाय को इस दिशा में बढ़ा रही हैं।
वर्ष 2017 तक मोबाइल और इंटरनेट स्वास्थ्य सेवाओं का बाजार 3000 करोड़ तक पहुंच सकता है। बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए तमाम सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मोबाइल व इंटरनेट स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश कर रही हैं।
भले ही मोबाइल आज छोटे-छोटे कस्बों तक पहुंच गया हो, लोगों में हेल्थ सर्विसेज के प्रति जागरूकता बहुत कम है। अनिल मानते हैं कि जानकारी का अभाव छोटे शहरों में ही नहीं बल्कि बड़े शहरों में भी है।