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दिवाली पर नवजात शिशु को इस खतरे से बचाएं

Fri, 01 Nov 2013 12:57 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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दिवाली की खुशियां तब काफूर हो सकती हैं जब आपके शिशु को इसका खामियाजा भुगतना पड़ जाए।
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तेज आवाज से नवजात के दिमाग पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आतिशबाजी की आवाज न सिर्फ दिमाग को विकसित होने से रोकती है, बल्कि आतिशबाजी के दौरान निकले केमिकल्स एलर्जी का भी कारण बनते हैं।

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भगवान महावीर अस्पताल के शिशु रोग विभाग के प्रमुख डॉ. अमन प्रताप सिंह ने बताया कि ज्यादा तेज आवाज बच्चों के दिमाग पर बुरा असर डालती है।

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आतिशबाजी की वजह से वातावरण में फैले केमिकल्स और धुएं की वजह से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इससे हृदय गति घटती-बढ़ती रहती है और पल्स रेट में भी उतार-चढ़ाव होता रहता है। ऐसे में नवजात के दिमाग पर असर पड़ सकता है। लिहाजा नवजात को जितना संभव हो तेज आवाज से बचाना चाहिए। नवजात को धुएं की वजह से एलर्जी भी खतरा रहता है।
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सर गंगाराम अस्पताल के ईएनटी विभाग के कंसलटेंट डॉ. आलोक अग्रवाल ने बताया कि 50 डेसिबल से अधिक आवाज नवजात के कान पर असर डालती है। तेज आवाज से नवजात के सुनने की क्षमता कमजोर होने का खतरा रहता है। बच्चों में चिड़चिड़ापन और भूख न लगने की प्रवृति भी विकसित हो सकती है।
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100 डेसिबल से ज्यादा ध्वनि से कान पर असर
लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल के ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ. अनूप राज का कहना है कि वयस्कों में 100 डेसिबल से अधिक आवाज कान के परदे पर असर डालता है। आतिशबाजी के दौरान लगातार तेज आवाज होती है। ऐसे में कान के अंदर की कमजोर हड्डियां गल भी सकती हैं। कान के अंदर की नसों के फटने का भी डर बना रहता है।

तेज आवाज से बचने के एहतियात
आतिशबाजी के दौरान कॉटन में सरसों तेल लगाकर कान में लगाएं।
तेज आवाज वाले पटाखों से परहेज करें।
घर के दरवाजे और खिड़की बंद करके रखें।
तेज आवाज से कोई दिक्कत हो तो विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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