माता पिता को बच्चों का मोटापा नज़र नहीं आ रहा और नतीजा ये हो रहा है कि बच्चों की सेहत पर ख़तरे बढ़ रहे हैं।
ब्रिटेन में किए गए एक अध्ययन में माता पिता की ये प्रवृत्ति सामने आई है।
लगभग तीन हज़ार परिवारों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि केवल चार माता-पिता को ही इस बात का एहसास था कि उनके बच्चे का वज़न अधिक है।
हाईजीन और ट्रॉपिकल मेडिसिन और ग्रेट ऑरमंड स्ट्रीट हॉस्पिटल के लंदन स्कूल की एक टीम ने इन परिवारों से पूछा कि उनके बच्चे का वज़न अधिक है, कम है या सामान्य है?
पता चला कि लगभग एक तिहाई परिवारों ने अपने बच्चों के वज़न की अनदेखी की है।
'रोल मॉडल'
ग्रेट ऑरमंड स्ट्रीट के प्रोफेसर रसेल वाइनर ने बीबीसी को बताया, "आधुनिक माता-पिता बच्चों के मोटापे पर ध्यान नहीं देते।"
ऐसा होने के पीछे खास वजह ये मानी जा रही है कि आमतौर पर लोगों का वज़न इतना बढ़ चुका है कि मोटापा एक सामान्य बात मानी जाने लगी है।
वाइनर कहते हैं, "इस परेशानी से निपटने के लिए पेरेंट्स को बच्चे के जन्म के समय से ही शिक्षित करने की जरूरत है।"
नतीजों पर बात करते हुए रॉयल सोसायटी फॉर पब्लिक हेल्थ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शर्ली क्रेमर कहती हैं, "स्कूलों में बच्चों को छोटी उम्र से ही सक्रिय जीवनशैली के महत्व और स्वस्थ आहार के बारे में बताया जाना चाहिए।"
वे बताती हैं, "बच्चों के लिए माता पिता रोल मॉडल होते हैं इसलिए जरूरी है कि उन्हें सही जानकारी हो।"
उन्होंने जंक फूड के विज्ञापन पर भी पाबंदी लगाने की जरूरत बताई और कहा कि इन पर कैलोरी के बारे में जानकारी भी दी जानी चाहिए।