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मार्केट में जल्द आएगी हर्बल एंटीबायोटिक

Thu, 18 Oct 2012 01:40 PM IST
हल्द्वानी/विजेंद्र श्रीवास्तव
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जल्द ही बिना साइड इफेक्ट वाली हर्बल एंटीबायोटिक उपलब्ध हो सकती है। पंतनगर विवि का जैव प्रौद्योगिकी संस्थान हर्बल एंटीबायोटिक विकसित कर रहा है। संस्थान के निदेशक का दावा है, हर्बल एंटीबायोटिक रोग फैलाने वाले जीवाणु को तो खत्म करेगी ही, इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होगा। इसे तैयार करने का काम अंतिम चरण में है। पशुओं पर परीक्षण करने की अनुमति भी मिल गई है।
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संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार, इलाज में एंटीबायोटिक का प्रयोग लंबे समय से हो रहा है। साथ ही कई बार एंटीबायोटिक के प्रति बैक्टीरिया प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं और फिर वह एंटीबायोटिक का असर नहीं होता। ऐसे में मेडिकल रिसर्च करने वाले संस्थानों और कंपनियों को नई एंटीबायोटिक तैयार करनी होती है।

यह भी तथ्य है कि केमिकल एंटीबायोटिक के ज्यादा प्रयोग से शरीर के किडनी, लिवर आदि अंगों पर दुष्प्रभाव का खतरा भी रहता है। इसे देखते हुए गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पटावाडांगर स्थित जैव प्रौद्योगिकी संस्थान ने हर्बल एंटीबायोटिक विकसित करने का काम करीब दो साल पहले शुरू किया था।
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संस्थान का उद्देश्य एक ऐसी एंटीबायोटिक को तैयार करना था, जो जीवाणु को खत्म करने में कारगर तो हो ही, इसका शरीर पर दुष्प्रभाव भी न पड़े। संस्थान के निदेशक डॉ. आरएस चौहान का कहना है कि हर्बल एंटीबायोटिक बनाने में पटवाडांगर के क्षेत्र में फैली कई जड़ी-बूटियों और पंचगव्य का इस्तेमाल किया गया है।

यह हर्बल एंटीबायोटिक रोग तो खत्म करेगी ही, साथ ही रासायनिक दवाओं से प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर चुके बैक्टीरिया को भी मारने में यह सक्षम होगी। संस्थान की वैज्ञानिक तनु बिष्ट का कहना है कि हर्बल एंटीबायोटिक शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाएगी और बैक्टीरिया को खत्म करने वाली कोशिकाओं को भी मजबूत करेगी।

दो साल में मार्केट में आने की उम्मीद
संस्थान निदेशक डॉ. आरएस चौहान कहते हैं कि हर्बल एंटीबायोटिक का लैब टेस्ट पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में पशुओं पर परीक्षण होना था। इसकी अनुमति पंत विवि की एनिमल इथिक्स कमेटी ने दी है। जल्द ही परीक्षण शुरू होगा।

इसके बाद पेटेंट और सरकारी प्रक्रियाओं के बाद फार्मूला-वन निजी कंपनी को हस्तांतरित किया जाएगा। कंपनी ही इसका व्यावसायिक उत्पादन करेगी। इन सभी कामों में करीब दो साल का समय लग सकता है।
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