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दिन भर लैपटॉप पर काम दे रहा है एक नया रोग

Mon, 16 Sep 2013 07:33 PM IST
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला
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घंटों तक गोद में लैपटॉप रखकर काम करने वाले लोग अब सावधान हो जाएं। जांघ पर देर तक लैपटॉप रखना त्वचा के लिए गंभीर समस्या हो सकता है। इसका असर त्वचा के लिए ‘लैपटॉप हाई सिंड्रोम’ नामक रोग की वजह भी हो सकता है जो आगे चलकर त्वचा के कैंसर में बदल कता है।
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इस तरह की बीमारी से पीड़ित मरीजों में आईटी सेक्टर, स्कूल-कालेज के छात्रों की संख्या ज्यादा है। त्वचा विशेषज्ञ की मानें तो यदि समय रहते इसका इलाज नहीं कराया गया तो त्वचा के कैंसर जैसे लक्षण दिखने लगते हैं और 10 फीसदी मरीजों में स्किन कैंसर का भी खतरा रहता है।

दिन भर बैठकर करना है काम तो बरतें ये सावधानियां

पंचकूला स्थित नेशनल स्किन हॉस्पिटल के डॉ. विकास शर्मा के अनुसार, ''एक महीने में इस तरह के करीब 15 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। ज्यादातर मरीज या तो आईटी सेक्टर से जुड़े हैं या फिर स्कूल-कालेज के छात्र हैं।''
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ऐसे हो सकता है यह रोग
ज्यादातर लैपटॉप यूजर्स थाई पर लैपटॉप रखकर काम करते हैं। यदि एक सप्ताह तक ऐसे ही 20 से 50 मिनट तक लगातार यूज किया जाता है तो त्वचा का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इससे त्वचा के निचली परत तक प्रभाव पड़ने लगता है और बाद में त्वचा की कोशिकाओं धीरे-धीरे टूटने के अलावा खून भी जमने लगता है।

ये हैं लक्षण
- शुरुआती दौर में जांघ की त्वचा का रंग लाल होने लगता है, फिर वह जाले का आकार बना लेता है।
- कुछ समय बाद वह भूरे रंग का हो जाता है और धीरे-धीरे जाले का आकार काला होने लगता है।
- यदि इस स्थिति में भी इलाज नहीं किया गया तो स्किन कैंसर डिजॉर्डर होने की आशंका बढ़ जाती हैं।

त्वचा से सीधा संपर्क, ज्यादा खतरनाक
मिनी स्कर्ट पहनकर थाई पर लैपटॉप रखकर इस्तेमाल करना ज्यादा खतरनाक है। ऐसे में जांघ पर लैपटॉप रखने से इसकी गर्मी त्वचा तक जल्दी पहुंचती है और तापमान 50 डिग्री तक पहुंचते ही यह खतरनाक साबित होने लगता है।

इन्हें ज्यादा प्रॉब्लम
- पुरुष यदि जांघ पर लैपटॉप रखकर लगातार चार घंटे से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और यही सिलसिला एक साल तक चलता है तो स्पर्म काउंट भी कम होने लगता है।
- जिन महिलाओं का त्वचा का रंग ज्यादा फेयर है, उनमें स्किन कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। एक सर्वे के आधार पर यह खुलासा हुआ है।
- जिन लोगों को अस्थमा या किडनी की समस्या है या फिर कोई व्यक्ति कैंसर से बचाव की दवा ले रहा है तो उसके लिए भी यह बीमारी ज्यादा खतरनाक है।

पहले बुजुर्गों को होती थी यह बीमारी
पैरों की ज्यादा सेंकाई करने की वजह पहले बुजुर्गों में यह बीमारी होती थी, लेकिन अब नई टेक्नोलॉजी के उपयोग में लापरवाही बरतने के कारण युवाओं में यह बीमारी ज्यादा होने लगी है।
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