वैसे तो बीमारियों के दौरान खुद पर ध्यान न दें तो उनका खामियाजा गहरा हो सकता है लेकिन ऐसे भी कुछ रोग हैं जिनमें बरती गई लापरवाही आपको कई गंभीर खतरों का शिकार बना सकती है। आइए जानें ऐसे पांच रोगों के बारे में जो आपके लिए दूसरे गंभीर रोगों का आमंत्रण हो सकते हैं।
1. माइग्रेनः स्ट्रोक या हार्ट अटैक
हॉवर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ता डॉ. टोबियास कुर्थ ने अपने अध्ययन में पाया कि माइग्रेन के दर्द की गति पर निर्भर करता है कि आपको दिल के दौरे या स्ट्रोक का कितना रिस्क है। शोध के अनुसार जिन लोगों को महीने में एक बार माइग्रेन का दर्द उठता ही है, उन्हें दिल के दौरे का 50 प्रतिशत अधिक रिस्क होता है जबकि माइग्रेन का दर्द सप्ताह में बार-बार दोहराता है उन्हें स्ट्रोक का रिस्क तीन गुना अधिक होता है।
बचाव के लिए फिलहाल कोई ठोस उपाय तो नहीं है लेकिन अमेरिका की नेशनल स्ट्रोक एसोसिएशन ने अपने अध्ययन के आधार पर माना कि कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण, माइग्रेन के ट्रिगर्स से परहेज, एक्सरसाइज और वजन पर नियंत्रण जैसे उपायों से इस रिस्क को कम जरूर किया जा सकता है।
2. हाई ब्लड प्रेशरः डायबिटीज
यह अब भी शोध का विषय है कि हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का संबंध कैसे है लेकिन इनका संबंध है, इसकी पुष्टि कई शोधों से होती है। बर्मिंघम एंड वुमेन्स हॉस्पिटल और हॉवर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं ने अपने शोध के आधार पर यह माना है कि हाई बीपी के मरीज को डायबिटीज का रिस्क अधिक होता है।
शोधकर्ताओं ने 38, 000 महिलाओं पर 10 साल के अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि ब्लड प्रेशर बढ़ने पर डायबिटीज का खतरा अधिक हो जाता है। अगर बीपी का मरीज मोटापे का शिकार हो तो यह खतरा दोगुना हो सकता है।
बचाव के लिए हाई बीपी के मरीज अपने डायबिटीज का टेस्ट करवाएं। वजन पर नियंत्रण रखें, नमक कम लें और सिगरेट या एल्कोहल की आदतों से छुटकारा पाएं।
3. सोरायसिसः हार्ट अटैक
जानकर आपको शायद हैरानी हो लेकिन त्वचा पर चकत्ते वाला रोग यानी सोरायसिस हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ा सकता है। पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जोएल एम. गेल्फैंड ने अपने अध्ययन के आधार पर यह दावा किया है।
उनके अनुसार, सोरायसिस से होने वाली सूजन कई बार शरीर की धमनियों को ब्लॉक कर देती है जिससे उन्हें हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है। उन्होंने सोरायसिस के मरीजों पर पांच साल के अध्ययन के आधार पर निष्कर्ष निकाला है।
सोरायसिस का तुरंत इलाज ही इससे बचाव का एकमात्र उपाय है।
4. मेटाबॉलिक सिंड्रोमः किडनी में स्टोन
मेटाबॉलिज्म से संबंझित समस्याएं यानी मेटाबॉलिक सिंड्रोम का दिल के दौरा, डायबिटीज जैसे रोगों से संबंध को लेकर कई शोध हो चुके हैं लेकिन हाल के एक शोध में इसका संबंध किडनी के स्टोन से भी बताया गया है।
शोध के अनुसार इस समस्या से ग्रसित लोगों को किडनी में स्टोन का खतरा 54 प्रतिशत अधिक रहता है।
इससे बचाव के लिए मोटापे पर नियंत्रम बेहद जरूरी है क्योंकि मोटे लोगों के शरीर में प्रोटीन और सोडियम की मात्रा अधिक होती है जो किडनी में स्टोन बनाने में मदद करती है।
5. दमाः अवसाद
यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोरैडो हेल्थ साइंस सेंटर के शोध के अनुसार दमा के मरीजों में अवसाद का रिस्क सबसे अधिक होता है। शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष पांच साल के अपने अध्ययन के आधार पर निकाला है जिसमें उन्होंने पाया कि 18 प्रतिशत दमा के रोगियों को अवसाद का खतरा अधिक रहता है।
दमा से उपचार के लिए वैकल्पिक थेरेपी जैसे योग, आयुर्वेद, होम्योपैथ आदि काफी प्रभावी हैं। इनकी मदद से बचाव कर सकते हैं।