गर्भावस्था के दौरान जच्चा-बच्चा की सेहत को लेकर घर के बड़े-बुजुगों से लेकर नई पीढ़ी तक तरह-तरह की मान्यताओं से बंधी है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आप गर्भवती महिलाओं और होने वाले बच्चे के लिए गर्भावस्था के दौरान जो धारणाएं बना लेते हैं, उनका वैज्ञानिक आधार क्या है?
आइए जानें गर्भावस्था के दौरान बेहद आम पांच धारणाओं के बारे में जो सिर्फ आपका मिथ हैं और इनका कोई वैज्ञानिक आधार है ही नहीं।
मिथ नं. 1 - गर्भ को देखकर ही बच्चे का लिंग पता लगाया जा सकता है।
फैक्ट - घरों में अक्सर ऐसी बात आपने अपनी दादी या मां के मुंह से सुनी होगी कि नीचे की ओर झुका हुआ पेट दिखे तो लड़का होगा और अगर ऊपर की ओर उठे तो लड़की होगी, लेकिन वैज्ञानिक तौर पर इसका कोई आधार नहीं है।
दरअसल, महिलाओं के गर्भ का आकार उनके पेट और मांसपेशियों की बनावट के आधार पर बढ़ता है। कई बार जुड़वा बच्चों या गर्भ में बच्चे की अवस्था के अनुसार भी पेट का आकार बदल सकता है, लेकिन किसी भी कारण से बच्चे का लिंग पेट के आकार से नहीं पता लगाया जा सकता है।
मिथ नं. 2 - गर्भावस्था के दौरान ज्यादा से ज्यादा आराम।
फैक्ट - गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को आराम और देखभाल की बहुत जरूरत होती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महिलाओं को रुटीन के काम भी न करने दें। बहुत अधिक आराम से भी प्रजनन में समस्याएं होती हैं। हालांकि महिलाओं को कितने आराम की जरूरत है इसका सही जज आपका डॉक्टर ही है।
मिथ नं. 3- गर्भवती मां के चेहरे से पता पड़ सकता है बच्चे का लिंग।
फैक्ट - आपने कई बार घर के बड़े-बुजुर्गों के मुंह से सुना होगा कि गर्भावस्था के बाद जिन महिलाओं के चेहरे पर अधिक ग्लो होता है उन्हें लड़की होगी। यह बिल्कुल निराधार है। गर्भावस्था के दौरान खानपान व हार्मोनल बदलाव की वजह से त्वचा और चेहरे में बदलाव दिख सकता है।
मिथ नं. 4 - दूध में केसर डालकर पीने बच्चा गोरा पैदा होगा।
फैक्ट - अक्सर गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान केसर वाला दूध यह कहकर पिलाया जाता है कि इससे गर्भ में पल रहा शिशु गोरा होगा। असलियर में बच्चे की त्वचा का रंग अनुवांशिक होता है।
मिथ नं. 5 - गर्भावस्था में मुंहासों से बच्चे का लिंग पता चल सकता है।
फैक्ट - अक्सर ऐसा मानते हैं कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अगर मुंहासे होते हैं तो उन्हें बेटी होगी। यह बिल्कुल निराधार है। गर्भावस्था के दौरान मुंहासे हार्मोनल बदलाव या ऑयली डाइट की वजह से हो सकते हैं पर इसका गर्भ में पल रहे शिशु के लिंग से कोई संबंध नहीं है।