शोधकर्ताओं का कहना है कि खुजली होने पर उसे जितना खुजलाया जाए, खुजली और बढ़ जाती है।
चूहों पर हुए शोध में पाया गया है कि खुजली के इस दौर को तोड़ना मुश्किल से मुश्किल होता जाता है और इसकी वजह है सेरोटोनिन हार्मोन। खुजली करते ही इसका स्राव शुरू हो जाता है।
हालाँकि इस शोध को अभी तक मनुष्यों पर नहीं आज़माया गया है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि रीढ़ में कुछ ख़ास सेरोटोनिन ग्राहियों को बंद करने से खुजली को कम किया जा सकता है।
त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि इस शोध से खुजली को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
क्या है कारण?
खुजली कई कारणों से हो सकती है। ये धूल से लेकर छोटे बालों और त्वचा की गंभीर बीमारियों से हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक त्वचा रोगों समेत कई अन्य वजहों से खुजली हो सकती है। खुजली करने का एक उद्देश्य दर्द पैदा करना होता है।
इससे तंत्रिकाओं को खुजली के संकेतों के बजाय दर्द के संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं। दर्द को नियंत्रित करने के लिए मस्तिष्क खुजली पैदा करने वाले न्यूरोट्रांसमिटर सेरोटोनिन हार्मोन का स्राव करता है।
वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर ज़ोउ फ़ेंग चेन के अनुसार रीढ़ में पहुंचने पर सेरोटोनिन खुजली नियंत्रित करने वाली तंत्रिका कोशिकाओं को सक्रिय करता है।
प्रोफ़ेसर चेन कहते हैं, "चूहों में खुजली का दुष्चक्र होता है, लेकिन यदि आप सेरोटोनिन की मात्रा कम कर दें तो खुजली की तीव्रता भी कम हो जाती है।"