अगर आप खाने में चिकन के शौकीन हैं तो यह जानकारी आपके लिए बड़ी खुशखबरी हो सकती है। एक शोध में यह माना गया है कि जो लोग किशोरावस्था में चिकन और मछली का सेवन अधिक करते हैं, उनमें कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा कम होता है।
लाइव सांइस में प्रकाशित इस शोध में 20,000 महिलाओं पर अध्ययन किया गया जो अपनी किशोरावस्था में चिकन खाती थीं। अध्ययन में पाया गया कि इन महिलाओं में पेट के निचले हिस्से में ट्यूमर बनने का रिस्क कम रहा जो आगे चलकर कोलोरेक्टल कैंसर में तब्दील हो जाते हैं।
हालांकि शोधकर्ताओं ने अभी तक इसके पीछे को ठोस कारण नहीं खोजा है और इस दिशा में अध्ययन कर ही रहे हैं, फिर भी उन्होंने यह जरूर माना है कि चिकन के सेवन का संबंध कैंसर से जरूर है और यह कैंसर के रिस्क को 40 प्रतिशत तक कम कर सकता है।
शोधकर्ता डॉ. कैथरीना निंपच के अनुसार, 'सभी प्रकार के कैंसर की अपेक्षा कोलोरेक्टल कैंसर का डाइट से सबसे गहरा संबंध होता है। इस वजह से हमने इस दिशा में अध्ययन शुरू किया। वैसे तो फेफड़ों के कैंसर का संबंध भी सिगरेट से होता है लेकिन कोलोरेक्टल कैंसर का इसकी तुलना में कहीं गहरा संबंध हमारी डाइट से है।'
दूसरी ओर, अमेरिकन जर्नल ऑफ एपिडेमोलॉजी में प्रकाशित एक अन्य शोध में यह माना गया है कि कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा अधिकतर लोगों को कम उम्र में ही होता है और यह धीरे-धीरे बढ़कर कैंसर का रूप ले लेता है।
गौरतलब है कि पहले हुए कई शोधों में यह माना गया है कि प्रोसेस्ड रेड मीट का सेवन कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ाता है। इस दिशा में यह अध्ययन एक नई कड़ी है।