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शुरुआती दौर में ऐसे पहचानें आंतों का कैंसर

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कैंसर से बचाव का सबसे सुरक्षित उपाय है, इसका शुरुआत में ही पता लगा लेना, लेकिन यह जांच से ही संभव है।
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एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आंत के कैंसर के मामले में जागरूकता का स्तर अपेक्षाकृत बहुत कम है।

इसके बाद कैंसर के ख़िलाफ अभियान चलाने वालों ने आंत के कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने पर जोर दिया है।

आंकड़ों से पता चला है कि इंग्लैंड में इस बीमारी के शिकार लोगों में आधे से कुछ ही ज़्यादा लोग जांच के लिए आगे आए हैं।

संस्था बीटिंग बाउल कैंसर ने अधिक से अधिक लोगों को जांच के लिए आगे आने की अपील की है और कहा है कि इंग्लैंड के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग को इसकी जांच को प्राथमिकता देनी चाहिए।
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आंकड़े बताते हैं कि 60 से 74 वर्ष की उम्र के बीच इस बीमारी के प्रति 58 प्रतिशत लोगों में जागरूरकता है।

जबकि स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर के मामले में जागरूरकता का प्रतिशत क्रमशः 72 और 79 प्रतिशत है।

आंत के कैंसर की जांच का कार्यक्रम बहुत नया है। इसे 2006 में इसे शुरू किया गया था।

संसदीय प्रश्नोत्तर के दौरान मिले आंकड़ों में क्षेत्रीय भिन्नता भी देखने को मिली।

जागरूकता
उदाहरण के लिए डोरसेट में 66 प्रतिशत लोग इस बीमारी को लेकर जागरुक है तो वहीं पश्चिमी लंदन केवल 42 प्रतिशत ही बीमारी के बारे में जानते हैं।

बीटिंग बाउल कैंसर के प्रमुख मार्क फ्लैनागन ने कहा, ''हमें इससे बेहतर करना होगा। हमें पता है कि समय रहते जांच कर ली जाए तो लोगों की जान बचाई जा सकती है।''
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चिह्नित आबादी में हर सदस्य की जांच हर दो साल में की जाती है।

इस जांच के जरिए उन गांठों का पता लगाने में मदद मिलती है जो कैंसर तो नहीं होता लेकिन आगे चलकर कैंसर के रूप में विकसित हो सकती हैं।

इस जांच कार्यक्रम के पहले चार वर्ष में 7,000 कैंसर रोगियों की पहचान की गई और 40,000 रोगियों की आंत की गांठें निकाली गईं।

नेशनल हेल्थ कैंसर स्क्रीनिंग प्रोग्राम के निदेशक प्रो. जूलिएटा पैटनिक के अनुसार, जागरूकता बढ़ाना अभी भी प्राथमिकता में है।
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