बेबिंका की सात परतों में मैदे, घी, चीनी, अंडे की जर्दी तथा नारियल के गाढ़े दूध वाली परतें जुबान पर सबसे पहले अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं। इसमें वैनीला की महक भी बड़ी दिलकश होती है। कुछ नुस्खों के अनुसार, इसमें कसे जायफल का पुट भी जरूरी है। क्रिसमस के मौके पर गोवा के लोग इसे बड़े शौक से बनाते और खाते रहे हैं और रिश्तेदारों एवं मित्रों को खिलाते हैं। वैसे इसे घर पर बनाने का चलन कम होता जा रहा है।
बेबिंका तैयार करने की विधि बहुत सरल हैै, पर हल्का, मध्यम मिठास वाल सुवासित बेबिंका बनाने के लिए खासे कौशल और धैर्य की जरूरत होती है। इसलिए बेकरी का सामान बेचने वाली कुछ खास दुकानों के उत्पाद की स्थानीय खपत भी है और निर्यात का बाजार भी उन्हीं के कब्जे में है। वैसे कहने को बेबिंका मकाउ तथा ब्राजील और अफ्रीका में भी बनाया जाता है, पर ऐसा नफीस नहीं। पुर्तगाल में बेबिंका बनाने की परंपरा नहीं थी।
दूसरे क्रियोल (मिश्रित नस्ल वाले) भोजन की तरह यह भारत में ही ईजाद किया गया और यहीं से सुदूर पूर्व तथा पश्चिम की तरफ फैला। यों केरल में भी अंडे की जर्दी से ‘मुत्तमाला’ नामक नाजुक और नफीस मिठाई बनाई जाती है, पर वह इतनी ‘जटिल’ नहीं। बहरहाल, एक जनश्रुति के अनुसार, बिबिओन नामक एक ईसाई नन ने इसका आविष्कार किया था और इसकी सात परतें पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन की सात पहाड़ियों का प्रतीक थीं। मेहमान को हो सकता है आकार छोटा लगा, इसलिए बाद में इसमें और परतें जोड़ी जाने लगीं। एक दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में प्रशांत महासागर क्षेत्र मैं उमड़ने वाले एक नहीं तीन-तीन समुद्री तूफानों को बेबिंका नाम दिया गया था। या तो वह मौसम विज्ञानी बेबिंका का चाहने वाला था या फिर ऐसा पुर्तगाली, जिसे अपने औपनिवेशिक साम्राज्य की यादें बेकरार करती रहती थीं।