फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल के दौरे व डायबिटीज से बचाएगा यह आयुर्वेदिक उपाय

Sat, 07 Jun 2014 11:10 AM IST
अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
विज्ञापन
हिमालय और नीलगिरि की पहाड़ियों में पाए जाने वाले दारुहरिद्रा नामक पौधे से मधुमेह की सर्वाधिक कारगर औषधि बनाई गई है। यह औषधि मधुमेह रोगियों के लिए तो रामबाण साबित होगी ही, यह हार्ट अटैक और ब्रेन हैमरेज में भी उपयोगी होगी।
विज्ञापन


बीएचयू आईएमएस के विशिष्ट प्रोफेसर एवं आयुर्वेद के विद्वान डॉ. जीपी दूबे ने ये बातें शुक्रवार को कहीं। वह बीएचयू पीपीपी सेल के मीडिया हॉल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इसके पेटेंट के लिए दो माह पहले आवेदन किया जा चुका है। जल्द ही फेडरल ड्रग एसोसिएशन (एफडीए) से भी मान्यता मिल जाएगी।

तीन माह बाद यह दवा भारतीय बाजारों में होगी। बीएचयू के इतिहास में यह पहली उपलब्धि होगी जिसकी विश्व स्तर पर महत्ता साबित होगी।

कई रोगों के उपचार में मददगार
प्रो. दूबे ने कहा कि डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत का हर सातवां व्यक्ति मधुमेह से पीड़ित है। ऐसे में भी आज तक ऐसी दवा विकसित नहीं की जा सकी थी जो मधुमेह और उसके कारण गुर्दे का खराब होना, ब्रेन हैमरेज जैसे रोगों की रोकथाम कर सके।
विज्ञापन


इसको ध्यान में रखते हुए सबसे पहले 2007 में सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलीक्यूलर बयोलॉजी (सीसीएमबी) हैदराबाद में ‘दारुहरिद्रा’ पर शोध शुरू किया गया। तब डॉ. लालजी सिंह वहां निदेशक थे।

इसके बाद डॉ. लालजी सिंह बीएचयू के कुलपति बने और यहां आईएमएस में शोध जारी रहा। कुलपति के निर्देशन में बीएचयू, एसआरएम यूनिवर्सिटी, आदेश विवि (पंजाब) और जीनोम फाउंडेशन के सहयोग से इस पौधे से नई औषधि की खोज की गई।

अमेरिका में सफल परीक्षण
इसका अमेरिका के एक विवि की प्रयोगशाला में परीक्षण भी किया गया जो सफल रहा। दवा में एक अन्य औषधीय पौधे ‘सप्तचक्र’ के भी कुछ अंश का इस्तेमाल किया गया है। बताया कि इस दवा के लिए चेन्नई की अरविंद फार्मा ने एफडीए के अप्रूवल आदि का खर्च देने पर सहमति जताई है।

पेटेंट पर विवाद
प्रो. जीपी दूबे ने बताया कि यह विडंबना ही है कि भारतीय औषधीय पौधे ‘दारुहरिद्रा’ पर चीन ने 134 और अमेरिका ने पांच पेटेंट करा रखे हैं। अब हमें जीनोम ट्रैकिंग के जरिये यह साबित करना होगा कि यह पौधा भारतीय मूल का है और हजारों साल पहले इसका आरंभिक प्रयोग भारत में ही हुआ।

यह सिद्ध करने के बाद पहले के सभी पेटेंट निरस्त कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस औषधि के पेटेंट का मसला नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी केंद्र सरकार के साथ मिलकर हल किया जाएगा।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें