डायबिटीज के रोगियों के लिए खुशखबरी है। कैंब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने नकली पैंक्रियाज तैयार किए हैं जिन्हें पैंक्रियाज की जगह लगाकर ब्लड शुगर पर नियंत्रण अब संभव हो सकेगा। ब्रिटेन में पांच रोगियों पर इनका परीक्षण सफल हो चुका है।
शोधकर्ताओं ने चार हफ्तों तक रात के समय रोगियों को आर्टिफिशियल पैंक्रियाज लगाकर रखा और उनका परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि आर्टिफिशियल पैंक्रियाज की मदद से उनके रक्त में शर्करा की मात्रा संतुलित रखने में आसानी हुई।
इस साल के अंत तक 24 लोगों पर इसका परीक्षण चार हफ्तों तक किया जाएगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसकी सफलता टाइप 1 डायबिटीज के उपचार में बहुत मदद मिलेगी।
गौरतलब है कि रक्त में शुगर का नियंत्रण दो हार्मोन करते हैं - इन्सुलिन और ग्लूकाजन, जिनका निर्माण पैंक्रियाज में होता है। इन्सुलिन को बीटा सेल्स बनाती हैं और ग्लूकाजन को अल्फा सेल्स बनाती हैं।
टाइप 1 डायबिटीज में पैंक्रियाज की बीटा सेल्स खत्म हो जाती हैं जिससे इन्सुलिन बनना बंद हो जाता है और शुगर पर नियंत्रण नहीं हो पाता है। आर्टिफिशियल पैंक्रियाज की मदद से इन्सुलिन बनाने वाली बीटा सेल और अल्फा सेल अपना कां अच्छी तरह कर पाएंगी।
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डॉ. रोमन होवोर्का टाइप 1 डायबिटीज से बचाव के लिए आर्टिफिशियल पैंक्रियाज बनाने के लिए साढ़े पांच साल के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इनके बारे में वह बताते हैं कि यह एक तरह का इन्सुलिन पंप सिस्टम है जो पैंक्रियाज के विकल्प के रूप में शरीर में काम करेगा।
यह ग्लूकोज को मिनट दर मिनट मापेगा और इन्सुलिन पंप को संदेश देगा कि वह शरीर की जरूरत के अनुसार इन्सुलिन का निर्माण करे।