छोटी-छोटी बातों को भूलने की आदत कब हमारे पहचानने, सोचने और समझने की शक्ति को छीन लेती है और उम्र बढ़ने के साथ-साथ लोगों को एल्जाइमर और डिमेन्शिया जैसी बीमारी का शिकार बना देती है, पता ही नहीं चल पाता। चिकित्सकों की मानें तो विश्व भर के एक चौथाई एल्जाइमर के रोगियों की तादाद अब भारत में है।
भारत में बढ़ी रोगियों की तादाद
इस बारे में फोर्टिस अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख संजय कुमार बताते हैं, 'विश्व भर में एल्जाइमर रोगियों की संख्या 1.8 करोड़ से लेकर 1.9 आंकी गई है जिसमें एक तिहाई रोगी भारत में है। सबसे बड़ी समस्या है कि एल्जाइमर के अधिकतर रोगियों की जानकारी का रिकॉर्ड ही नहीं बन पाता है।'
वहीं 'एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज' के परमार्शदाता नजीब रहमान का दावा है कि आज हमारे देश में 60 वर्ष से अधिक आयु के प्रति 20 लोगों में से एक और 80 वर्ष से अधिक आयु के प्रति पांच में से एक व्यक्ति एल्जाइमर का शिकार है।
आखिर क्या है एल्जाइमर
एल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति के पहचानने और सोचने-समझने की क्षमता खत्म हो जाती है। इसमें मस्तिष्क की नर्व सेल्स मर जाती हैं जिससे मस्तिष्क किसी भी प्रकार की जानकारी को रखने में अक्षम हो जाता है।
इसके कारण का सही तरीके से पता आज तक नहीं चल पाया है इसलिए इसका ठोस उपचार अब तक हमारे बीच नहीं है। हालांकि इसके उपचार कि दिशा में नित नए प्रयोग होते रहते हैं फिर भी इसकी पहचान अगर शुरुआती दौर में ही हो जाए तो रोगी और उसके परिवार को संभलने का अवसर तो मिल ही सकता है।
एल्जाइमर के लक्षण
एल्जाइमर के शुरुआती दौर में छोटी-छोटी बातों को भूलना, शब्दों को याद रखने में दिक्कत, मूड का जल्दी-जल्दी बदलना आदि लक्षण होते हैं। बाद में रोगी चेहरों को भूलने लग जाता है, चीजों और जगहों को भूलना उसकी दिनचर्या का हिस्सा हो जाता है।
वह बहुत जल्दी आत्मविश्वास खो देता है और हमेशा असमंजस में रहता है। बिना किसी बात के हंसता या रोता है और उसे हमेशा यह डर रहता है कि सामने वाला व्यक्ति उसे नुकसान पहुंचा सकता है।