सर्दियों का मौसम वैसे तो बहुत सुहाना लगता है, लेकिन बीमारियों के पनपने के लिए यह मौसम सबसे ज्यादा मुफीद होता है। जरा सी लापरवाही से आप विंटर एलर्जी का शिकार हो सकते हैं। इसलिए सावधानी बरतें।
ठंड के कारण हाथ पैरों की अंगुलियां लाल हो जाती हैं। ऐसे में अंगुलियों में सूजन और खुजली होना आम बात है। बार-बार पानी के संपर्क में आने से अंगुलियों के पोर पक भी सकते हैं और इसे ठीक होने में काफी वक्त लगता है।
यह विंटर एलर्जी का ही एक प्रकार है। इससे बचने के लिए ठंड से बचना और शरीर को गर्म रखना जरूरी है।
डर्मेटाइटिस
सर्दियों में त्वचा कई तरह की एलर्जी का शिकार होने लगती है। इसमें डर्मेटाइटिस, एग्जीमा, त्वचा में दरार या चकत्ते पड़ना, खुजली होना आदि शामिल हैं। अक्सर त्वचा में नमी कम होने से यह दिक्कत होती है।
फेफड़ों में एलर्जी
सर्दियों में हमारे शरीर की कोशिकाएं और श्वास-नली सिकुड़ जाती है। जिससे सांस लेने में परेशानी होती है। अस्थमा के मरीजों को इस मौसम में खास दिक्कत होती है।
फेफड़ों के संक्रमण में क्रॉनिक अब्सट्रैक्टिव पल्मनरी डिजीज, अंडरलाइन लंग डिजीज और ब्रॉकइटिस का खतरा बढ़ जाता है। बैक्टीरियरल और वायरल इनफेक्शन भी हो सकता है। धूल और ठंड के कारण यह एलर्जी होती है।
नाक से एलर्जी
सर्दियों में सामान्य एलर्जी नाक से होती है, जिसे नेजल ब्रॉनकियल एलर्जी कहते हैं। इसमें नाक बहना, छींक आना, आंखों से पानी, नाक में खराश, थकावट आदि होने की समस्या होती है।