Gopashtami 2025: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व गायों की पूजा और गोसेवा को समर्पित है। सनातन परंपरा में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, क्योंकि उसके शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माना गया है। 2025 में गोपाष्टमी का पर्व 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जा रहा है। इस दिन गाय और बछड़ों की विधिवत पूजा की जाती है और गोसेवा का विशेष महत्व होता है।
गोपाष्टमी का इतिहास और पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण ने बाल्यावस्था में गौचारण यानी गाय चराने का कार्य आरंभ किया, उसी दिन को गोपाष्टमी कहा गया। इस दिन श्रीकृष्ण और बलराम ने नंद बाबा से अनुमति लेकर पहली बार गायों को वन में चराने के लिए ले गए थे। गाय चराने की इस लीला ने गोपालक श्रीकृष्ण के जीवन का नया अध्याय खोला और तभी से यह पर्व “गोपाष्टमी” कहलाया।
गोपाष्टमी का धार्मिक महत्व
गोपाष्टमी केवल एक पूजा नहीं बल्कि गौसेवा, करुणा और पर्यावरण संतुलन का संदेश देती है। हिन्दू धर्म में कहा गया है, “गावो विश्वस्य मातरः।” अर्थात गाय सम्पूर्ण सृष्टि की माता है।इस दिन गोशालाओं में गायों को स्नान करवाया जाता है, उन पर हल्दी-कुमकुम लगाया जाता है, पुष्पमालाएं पहनाई जाती हैं और उन्हें गुड़, चना, हरी घास और फल खिलाए जाते हैं।
गोपाष्टमी पर पूजा-विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- गौ माता को स्नान कराकर उन्हें हल्दी, चंदन, रोली और फूलों से सजाएं।
- गाय के सींगों पर हल्दी का तिलक लगाएं और गले में माला पहनाएं।
- दीप जलाकर गो माता की आरती करें और उन्हें गुड़, हरा चारा, फल अर्पित करें।
- गाय की परिक्रमा करें और आशीर्वाद प्राप्त करें।
- कई स्थानों पर महिलाएं इस दिन गौ पूजन के साथ ब्रह्मचारी श्रीकृष्ण और बलराम की भी पूजा करती हैं।