आज विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य आत्महत्या के बढ़ते मामलों को रोकने का है। देश-दुनिया में रोजाना कई लोग आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा लेते हैं। आत्महत्या के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए इसके शुरुआती लक्षणों का पता होना बहुत जरूरी होता है। आत्महत्या के शुरुआती लक्षणों का पता होने पर हम किसी की जान बचाने में सफल हो सकते हैं। आत्महत्या से जुड़ी अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए अमर उजाला ने हल्द्वानी की मनोचिकित्सक डॅाक्टर संगीता जोशी से बातचीत की। इस लेख के माध्यम से हम आपको बताते हैं कि डॅाक्टर संगीता जोशी का आत्महत्या के बारे में क्या कहना है...
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कोई भी व्यक्ति अचानक आत्महत्या जैसा बड़ा कदम नहीं उठाता है- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
आत्महत्या जैसा बड़ा कदम कोई भी अचानक नहीं उठाता है
डॅाक्टर संगीता जोशी कहती हैं कि कोई भी व्यक्ति अचानक आत्महत्या जैसा बड़ा कदम नहीं उठाता है। आत्महत्या करने वाला व्यक्ति बहुत लंबे समय से सुसाइड करने के बारे में सोच रहा होता है। डॅाक्टर संगीता जोशी कहती हैं कि कुछ संकेतों से आसानी से पता चल सकता है कि व्यक्ति आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा सकता है।
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अकेलेपन का शिकार होने की वजह से व्यक्ति आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा सकता है- सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
प्रिय व्यक्ति के निधन के कारण व्यक्ति आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा सकता है
डॅा संगीता जोशी कहती हैं कि किसी प्रिय व्यक्ति के निधन के कारण भी व्यक्ति आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा सकता है। प्रिय व्यक्ति के निधन के कारण व्यक्ति अकेले रहने लगता है और अकेलेपन का शिकार हो जाता है। अकेलेपन का शिकार होने की वजह से व्यक्ति आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा सकता है।
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हमेशा दुखी रहने वाले लोग हमेशा नकारात्मक विचारों से घिरे रहते हैं- सांकेतिक तस्वीर
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हमेशा दुखी रहने वाला व्यक्ति
डॅा संगीता जोशी कहती हैं कि जो व्यक्ति हमेशा दुखी रहता है उसकी आत्महत्या करने की संभावनाएं अधिक रहती हैं। ऐसे लोगों से बात करते समय दुख और अवसाद के लक्षण आसानी से दिख सकते हैं। हमेशा दुखी रहने वाले लोग हमेशा नकारात्मक विचारों से घिरे रहते हैं।
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आत्महत्या करने वाला व्यक्ति सोशल मीडिया से भी दूरी बनाने लगता है- सांकेतिक तस्वीर
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सोशल मिडिया से दूरी बना लेते हैं आत्महत्या करने वाले लोग
आत्महत्या करने वाला व्यक्ति सबसे दूरी बनाना शुरू करने लगता है। ऐसे व्यक्ति किसी भी समारोह, आयोजन में जाना भी पसंद नहीं करते हैं। डॅाक्टर संगीता जोशी कहती हैं कि आत्महत्या करने वाला व्यक्ति सोशल मीडिया से भी दूरी बनाने लगता है। हालांकि डॅाक्टर संगीता जोशी का ये भी कहना है कि सोशल मीडिया से दूरी बनाने के और भी कई कारण हो सकते हैं, जरूरी नहीं सोशल मीडिया से दूरी बनाने वाला हर व्यक्ति आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठाने वाला हो।
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आत्महत्या करने वाले व्यक्ति के व्यवहार में कुछ समय पहले से बदलाव आने लगता है- सांकेतिक तस्वीर
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व्यवहार में बदलाव आने लगता है
डॅाक्टर संगीता जोशी कहती हैं कि आत्महत्या करने वाले व्यक्ति के व्यवहार में कुछ समय पहले से बदलाव आने लगता है। ऐसे लोग दुनिया से दूरी बनाने लगते हैं और अकेला रहना पसंद करते हैं। ऐसे लोगों को कई आना-जाना भी पसंद नहीं होता है।
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आत्महत्या जैसा बड़ा कदम व्यक्ति किसी चीज से डर की वजह से भी उठा सकता है- सांकेतिक तस्वीर
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किसी चीज से डर भी हो सकता है आत्महत्या का कारण
आत्महत्या जैसा बड़ा कदम व्यक्ति किसी चीज से डर की वजह से भी उठा सकता है। डॅाक्टर संगीता जोशी कहती हैं कि बहुत से मामलों में ऐसा भी होता है कि व्यक्ति किसी चीज से डर की वजह से आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा लेता है। कुछ समय पहले ही दिल्ली में आईआरएस अधिकारी ने कोरोना के डर की वजह से तेजाब पीकर जान दे दी थी।
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आत्महत्या करने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान रहने लगता है- सांकेतिक तस्वीर
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व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान रहने लगता है
डॅाक्टर संगीता जोशी कहती हैं कि आत्महत्या करने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान रहने लगता है। अगर आपको कोई मानसिक रूप से परेशान लगे तो उसकी हरसंभव मदद करने का प्रयास करें। मानसिक रूप से परेशान रहने के कई कारण हो सकते हैं।
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बहुत से मामलों में आत्महत्या करने वाला व्यक्ति अपनों से माफी भी मांगता है- सांकेतिक तस्वीर
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अंतिम समय में अपनों से बात
डॅाक्टर संगीता जोशी कहती हैं कि आत्महत्या करने से पहले व्यक्ति अपनों से बात जरूर करता है। बहुत से मामलों में देखा जाता है कि व्यक्ति आत्महत्या करने से पहले जिससे वो सबसे ज्यादा प्रेम करता है उस व्यक्ति से बात जरूर करता है। डॅाक्टर संगीता जोशी कहती हैं कि बहुत से मामलों में आत्महत्या करने वाला व्यक्ति अपनों से माफी भी मांगता है।
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पैनिक अटैक पड़ने को भी आत्महत्या का संकेत समझा जा सकता है- सांकेतिक तस्वीर
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पैनिक अटैक
डॅाक्टर संगीता जोशी कहती हैं कि पैनिक अटैक पड़ने को भी आत्महत्या का संकेत समझा जा सकता है, परंतु बहुत कम मामलों में ही व्यक्ति को पैनिक अटैक पड़ता है। अगर आपके आसपास किसी को पैनिक अटैक पड़े तो आपको उस व्यक्ति की हरसंभव मदद करने का प्रयास करना चाहिए।
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चिंता और डर की शुरुआत होने को पैनिक अटैक कहा जाता है- सांकेतिक तस्वीर
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पैनिक अटैक क्या होता है
चिंता और डर की शुरुआत होने को पैनिक अटैक कहा जाता है। पैटिक अटैक होने पर व्यक्ति को अचानक बहुत ज्यादा घबराहट होने लगती है और उसे डर भी लगने लगता है।