बच्चों से लेकर वयस्कों तक सभी ओरल हेल्थ समस्याओं का शिकार
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि लगभग 50% भारतीय वयस्क पेरिओडोंटल बीमारी से पीड़ित हैं, वहीं बच्चों में दांतों की सड़न व्यापक रूप से देखी जाती है। पेरिओडोंटल रोग, जिसे मसूड़ों की बीमारी के रूप में भी जाना जाता है, ये आमतौर पर बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होता है जो मसूड़ों और दांतों को सहारा देने वाली हड्डी को नुकसान पहुंचाता है। ओरल हाइजीन पर ध्यान न देना इसका प्रमुख कारण माना जाता है।
अमर उजाला से बातचीत में लखनऊ स्थित दंत रोग विशेषज्ञ डॉ रमन श्रीवास्तव बताते हैं कि जागरूकता बढ़ने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अब भी मुंह की स्वच्छता को अनदेखा कर रहे हैं। ओरल हेल्थ का ध्यान न रखना सिर्फ दांतों और मसूड़ों की सेहत तक ही सीमित नहीं है। मौखिक स्वच्छता में गड़बड़ी के कारण ब्रेन और हार्ट हेल्थ पर भी नकारात्मक असर हो सकता है।
डॉक्टर कहते हैं, दांतों को दो बार ब्रश करना तो जरूरी है ही साथ ही धूम्रपान-शराब से तुरंत दूरी बना लेना भी जरूरी है।
ओरल हेल्थ का हृदय स्वास्थ्य पर असर
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मौखिक स्वास्थ्य समस्या बढ़ा सकती है हृदय रोगों का खतरा
अध्ययनों से पता चला है कि मौखिक स्वास्थ्य पर ध्यान न देने वाले लोगों में हृदय रोग और स्ट्रोक की दर अधिक होती है। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि पेरिओडोंटाइटिस और मसूड़े में सूजन पैदा करने वाले बैक्टीरिया रक्तप्रवाह के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों में भी पहुंच सकते हैं। इससे हृदय और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में सूजन और क्षति का खतरा बढ़ जाता है।
साल
2018 में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने लगभग दस लाख लोगों के डेटा का विश्लेषण किया, जिनमें से 65,000 से अधिक को हृदय संबंधी समस्याओं (हार्ट अटैक सहित) की दिक्कत देखी गई। विशेषज्ञों ने पाया कि उम्र के हिसाब से दांतों के की समस्याएं (खराब मौखिक स्वास्थ्य का एक उपाय) भी कोरोनरी हार्ट डिजीज को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। धूम्रपान को इसके लिए एक प्रमुख जोखिम कारक पाया गया है।
डायबिटीज के मरीजों की भी बढ़ सकती है दिक्कत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि यदि आपका ओरल हेल्थ ठीक नहीं है तो समय के साथ इसका असर डायबिटीज की स्थिति और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में भी बाधा उत्पन्न कर सकती है। मसूड़ों की बीमारी पर ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण पूरे शरीर में सूजन की दिक्कत बढ़ने लग जाती है जिससे ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। अनियंत्रित डायबिटीज की समस्या
हृदय रोग और किडनी की बीमारी का भी कारण बन सकता है।
ओरल कैंसर का भी बढ़ता खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि 2020 से 2040 तक मुंह के कैंसर (ओरल कैंसर) की घटनाएं 50.7% तक बढ़ सकती हैं। ओरल कैविटी कैंसर के अनुमानित मामले 60 लोगों में से एक में हो सकते हैं। निष्कर्षों से पता चलता है कि जो लोग शराब और तंबाकू दोनों का सेवन करते हैं उनमें मुंह के कैंसर का खतरा उन लोगों की तुलना में 8 गुना अधिक होता है जो दोनों का सेवन नहीं करते हैं। सिगरेट-बीड़ी पीना और सुपारी या पान चबाना भी उतना ही हानिकारक है।
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स्रोत और संदर्भ
Gum disease and the connection to heart disease
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