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Oral Health Day: ओरल हेल्थ का रखें ध्यान वरना हृदय रोग-कैंसर का हो जाएंगे शिकार, ये गलती पड़ सकती है भारी

Thu, 20 Mar 2025 01:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमर उजाला से बातचीत में लखनऊ स्थित दंत रोग विशेषज्ञ डॉ रमन श्रीवास्तव बताते हैं कि जागरूकता बढ़ने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अब भी मुंह की स्वच्छता को अनदेखा कर रहे हैं। ओरल हेल्थ का ध्यान रखना सिर्फ दांतों और मसूड़ों की सेहत तक ही सीमित नहीं है।  मौखिक स्वच्छता में गड़बड़ी के कारण ब्रेन और हार्ट हेल्थ पर भी नकारात्मक असर हो सकता है।
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ओरल हेल्थ का ध्यान रखना बहुत जरूरी - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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World Oral Health Day: लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी का असर संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला हो सकता है। आमतौर पर हम सभी हार्ट, किडनी और लंग्स की समस्याओं पर तो ध्यान देते रहते हैं पर क्या आप अपने ओरल हेल्थ यानी मौखिक स्वच्छता को लेकर सतर्क हैं?

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ओरल हेल्थ पर भले ही अक्सर आपका ध्यान न जाता हो पर ये गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। आंकड़े बताते हैं कि भारतीय लोगों में मौखिक स्वास्थ्य से संबधित समस्याओं के मामले बढ़ते जा रहे हैं जो समय के साथ कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाने वाले हो सकते हैं।

मौखिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों और मौखिक स्वच्छता के महत्व के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 20 मार्च को वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे मनाया जाता है। आंकड़े बताते हैं कि देशभर में दांतों की सड़न, मसूड़ों की बीमारी और मुंह के कैंसर के मामले बढ़े हैं, लाखों लोग दांत से संबंधित समस्याओं से पीड़ित हैं, जिसका असर उनके समग्र स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

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ओरल हेल्थ की समस्या - फोटो : Freepik.com
बच्चों से लेकर वयस्कों तक सभी ओरल हेल्थ समस्याओं का शिकार

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि लगभग 50% भारतीय वयस्क पेरिओडोंटल बीमारी से पीड़ित हैं, वहीं बच्चों में दांतों की सड़न व्यापक रूप से देखी जाती है। पेरिओडोंटल रोग, जिसे मसूड़ों की बीमारी के रूप में भी जाना जाता है, ये आमतौर पर बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होता है जो मसूड़ों और दांतों को सहारा देने वाली हड्डी को नुकसान पहुंचाता है। ओरल हाइजीन पर ध्यान न देना इसका प्रमुख कारण माना जाता है।

अमर उजाला से बातचीत में लखनऊ स्थित दंत रोग विशेषज्ञ डॉ रमन श्रीवास्तव बताते हैं कि जागरूकता बढ़ने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अब भी मुंह की स्वच्छता को अनदेखा कर रहे हैं। ओरल हेल्थ का ध्यान न रखना सिर्फ दांतों और मसूड़ों की सेहत तक ही सीमित नहीं है। मौखिक स्वच्छता में गड़बड़ी के कारण ब्रेन और हार्ट हेल्थ पर भी नकारात्मक असर हो सकता है।

डॉक्टर कहते हैं, दांतों को दो बार ब्रश करना तो जरूरी है ही साथ ही धूम्रपान-शराब से तुरंत दूरी बना लेना भी जरूरी है।

ओरल हेल्थ का हृदय स्वास्थ्य पर असर - फोटो : Freepik.com
मौखिक स्वास्थ्य समस्या बढ़ा सकती है हृदय रोगों का खतरा

अध्ययनों से पता चला है कि मौखिक स्वास्थ्य पर ध्यान न देने वाले लोगों में हृदय रोग और स्ट्रोक की दर अधिक होती है। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि पेरिओडोंटाइटिस और मसूड़े में सूजन पैदा करने वाले बैक्टीरिया रक्तप्रवाह के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों में भी पहुंच सकते हैं। इससे हृदय और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में सूजन और क्षति का खतरा बढ़ जाता है। 

साल 2018 में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने लगभग दस लाख लोगों के डेटा का विश्लेषण किया, जिनमें से 65,000 से अधिक को हृदय संबंधी समस्याओं (हार्ट अटैक सहित) की दिक्कत देखी गई। विशेषज्ञों ने पाया कि उम्र के हिसाब से दांतों के की समस्याएं (खराब मौखिक स्वास्थ्य का एक उपाय) भी कोरोनरी हार्ट डिजीज को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। धूम्रपान को इसके लिए एक प्रमुख जोखिम कारक पाया गया है।

डायबिटीज के मरीजों की भी बढ़ सकती है दिक्कत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि यदि आपका ओरल हेल्थ ठीक नहीं है तो समय के साथ इसका असर डायबिटीज की स्थिति और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में भी बाधा उत्पन्न कर सकती है। मसूड़ों की बीमारी पर ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण पूरे शरीर में सूजन की दिक्कत बढ़ने लग जाती है जिससे ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। अनियंत्रित डायबिटीज की समस्या

हृदय रोग और किडनी की बीमारी का भी कारण बन सकता है।
 
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ओरल कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com
ओरल कैंसर का भी बढ़ता खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि 2020 से 2040 तक मुंह के कैंसर (ओरल कैंसर) की घटनाएं 50.7% तक बढ़ सकती हैं। ओरल कैविटी कैंसर के अनुमानित मामले 60 लोगों में से एक में हो सकते हैं। निष्कर्षों से पता चलता है कि जो लोग शराब और तंबाकू दोनों का सेवन करते हैं उनमें मुंह के कैंसर का खतरा उन लोगों की तुलना में 8 गुना अधिक होता है जो दोनों का सेवन नहीं करते हैं। सिगरेट-बीड़ी पीना और सुपारी या पान चबाना भी उतना ही हानिकारक है।



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स्रोत और संदर्भ
Gum disease and the connection to heart disease


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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